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अधिकारियों की होगी मौज, खिलाड़ी करें इंतजार
खेलविभाग में इस समय आर्थिक हालत ठीक नहीं चल रहे हैं। विशेषकर खिलाड़ियों के लिए। विभाग के पास तो खेलों के आयोजन के लिए बजट है और ही स्पैट में चयनित खिलाड़ियों के लिए।
जिससे खिलाड़ी वर्ग निराश है, लेकिन वहीं दूसरी ओर अधिकारी वर्ग की मौज होने जा रही है। विभाग की ओर से जिला खेल एवं युवा कार्यक्रम अधिकारी को गाड़ी का तोहफा दिया जा रहा है। इस बाबत प्रस्ताव बनाकर निदेशालय में भेजा गया है।
स्पैट:हर महीने मिलते हैं डेढ़ और दो हजार रुपए: स्पोर्टसएंड फिजिकल एप्टीट्यूड स्कीम यानि स्पैट अधिकारियों की अनदेखी का शिकार है। करीब तीन महीने से स्कॉलरशिप राशि नहीं मिली है। जिसके चलते खिलाड़ियों की सेंटरों पर उपस्थिति भी कम हो रही है। जब भी खिलाड़ी विभाग के अधिकारियों के पास स्पैट राशि जारी किए जाने बाबत पूछते हैं, एक ही जवाब मिलता है कि प्रक्रिया चल रही है।
इन्हेंमिलती है स्कॉलरशिप: विभागखिलाड़ियों के तीन राउंड में ट्रायल लेता है। उसके बाद खिलाड़ियों का फाइनल चयन कर प्रति महीने स्कॉलरशिप दी जाती है।
खिलाड़ियों का चयन दो आयु वर्गों में होता है। आठ से 14 आयु वर्ग के खिलाडिय़ों को प्रति महीने डेढ़ हजार और इससे ऊपर 19 साल तक के खिलाड़ियों को दो हजार रुपये प्रति महीने की स्कॉलरशिप मिलती है।
देरीके लिए यह है मूल कारण: हरसाल स्पैट खिलाड़ियों को पैसा एक साथ मिलता है। यह परेशानी इसलिए है क्योंकि स्पैट स्कीम को हरियाणा के वित्त विभाग ने अभी तक पास नहीं किया है। जिसके लिए अलग से बजट का भी कोई प्रावधान नहीं है।
पायकाहोनी थी एक सितंबर से: पायकाखेलों का आयोजन एक सितंबर से किया जाना था, लेकिन अभी तक आयोजन होना तो दूर कार्यक्रम तक नहीं बना। ऐसे में ग्रामीण खेलों का खेल अभियान खिलाड़ियों के लिए सिवाए इंतजार और नहीं दे रहा है।
^ निदेशालय स्तर से बजट अभी तक आवंटित नहीं किया गया है। विभागीय अधिकारी इसके लिए प्रयासरत हैं। बजट की मंजूरी होने के साथ ही प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। \\\'\\\' यशवीरगोयत, डीएसओ,सोनीपत।
विभागीय निदेशालय में शिकायत पहुंची थी कि काफी कोच खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने आते नहीं हैं। वहीं जो आते हैं वे केवल प्रशिक्षण देने के बजाय पूरा दिन कुर्सी पर बैठकर गुजार देते हैं। डीएसओ को समय-समय पर उनके अधीन आने वाले प्रशिक्षण केंद्रों का दौरा करना होता है। दौरे के दौरान देखना होता ह