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दो गैस कनेक्शन हैं तो एक होगा अपने आप ब्लॉक
एक ही नाम पर दो-दो गैस कनेक्शनों की सुविधा ले रहे उपभोक्ताओं को आने वाले दिनों में नुकसान उठाना पड़ेगा। गैस कंपनियों द्वारा एक कॉमन साफ्टवेयर तैयार किया गया है। इस सॉफ्टवेयर से उन लोगों का राज खुल जाएगा, जिन्होंने एक साथ दो गैस कनेक्शन ले रखे हैं। गैस कंपनियों ने सॉफ्टवेयर को आपस में लिंक कर एक दूसरे के उपभोक्ताओं की मॉनीटरिंग शुरू कर दी है। इससे एक ही नाम और पते पर अलग-अलग कंपनियों की सेवा ले रहे उपभोक्ताओं का एक कनेक्शन साफ्टवेयर ब्लॉक कर देगा।
जिले में 17 गैस एजेंसियां हैं। जिनमें गैस उपभोक्ताओं की संख्या 2.20 लाख है, लेकिन बहुत से ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने एक ही नाम पते पर एक साथ दो से तीन गैस कंपनियों के कनेक्शन ले रखे हैं। ऐसा करके वे एक साथ कई गैस कनेक्शनों का फायदा ले रहे हैं। गैस कंपनियों ने सॉफ्टवेयर को आपस में लिंक कर लिया है जिससे एक दूसरे के गैस उपभोक्ताओं की मॉनीटरिंग की जा रही है। इससे ये पता चल जाता है कि एक ही नाम से कितने लोगों के पास डबल गैस कनेक्शन हैं। पता लगने पर उपभोक्ता का सिर्फ एक ही कनेक्शन रखा जाएगा। दूसरा कनेक्शन ब्लॉक हो जाएगा। इसके बाद उपभोक्ता को एक कनेक्शन सरेंडर करना पड़ेगा।
उपभोक्ताओं को सब्सिडी से जोड़ने के लिए एक जनवरी से डीबीटीएल योजना शुरू हो चुकी है। लेकिन अब भी बड़ी संख्या में गैस उपभोक्ताओं के आधार कार्ड या फिर बैंक अकाउंट उनके खातों से लिंक नहीं हो पाया है। वहीं कुछ उपभोक्ता ऐसे भी हैं जिन्होंने आधार कार्ड बैंक अकाउंट की फोटो कॉपी एजेंसी में दे रखी है, लेकिन वे लिंक नहीं हो पाए हैं।
यह कवायद पहले भी शुरू की गई थी। लेकिन उस वक्त कामयाब नहीं हो पाई। इसलिए अब इसे बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। एक कनेक्शन सरेंडर करने पर ही दूसरा कनेक्शन चालू मिल पाएगा। यह प्रक्रिया मार्च तक चलेगी। जिन लोगों के पास दो या तीन गैस कनेक्शन हैं वे ब्लॉक होने से पहले खुद भी एक कनेक्शन को सरेंडर करवा सकते हैं। इसके लिए एजेंसी में जमा उनकी सिक्योरिटी राशि वापस हो जाएगी। ऐसा नहीं करने वाले उपभोक्ताओं को तय समय के बाद सिक्योरिटी जब्त कर ली जाएगी।
एक से ज्यादा गैस कनेक्शन धारकों अपनी मर्जी से ही दूसरा कनेक्शन सरेंडर करेंगे तो ज्यादा अच्छा होगा। क्योंकि ऐसा करके अपनी नजदीकी पसंद की एजेंसी से गैस की सुविधा ले सकेंगे। यदि खुद सरेंडर नहीं करते तो गैस कंपनी अपनी मर्जी से कोई भी कनेक्शन ब्लॉक कर देगी। इसमें हो सकता है कि नजदीकी एजेंसी का कनेक्शन बंद हो जाए और दूर स्थित एजेंसी में गैस लेने जाना पड़े।
^कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा देने के साथ-साथ कालाबाजारी पर भी रोक लगाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। जिसके तहत तरह तरह के प्रयोग किए जा रहे हैं। इसी तरीके का यह सॉफ्टवेयर भी है। जिससे पारदर्शिता आएगी और उपभोक्ता कंपनी को राहत मिलेगी।\\\'\\\' प्रदीपकुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक, इंडियन ऑयल कारपोरेशन, लिमिटेड, नई दिल्ली।
सोनीपत . इंडेनगैस एजेंसी के सिलेंडर।