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रेत की खदानों की नहीं मिल रहा खरीदार, नहीं हुई बोली

7 वर्ष पहले
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जिलाखनन अधिकारी कार्यालय परिसर में मंगलवार को जिले की चार साइटों के लिए यूनिट एक बोली के लिए टेंट लगाकर बोली दाताओं का इंतजार किया जा रहा था। लेकिन इन खदानों की बोली लगाने के लिए एक भी ठेकेदार सामने नहीं आया। इस कारण बोली कमेटी के चेयरमैन डीसी समीर पाल सरो भी करीब आधा घंटा तक उनका इंतजार कर वापस लाैट गए। जबकि इस साइट का रिजर्व प्राइस पिछली बोली से करीब 25 प्रतिशत कम कर दिया गया था।

दिसंबर 2013 में जिला खनन विभाग ने खदानों से रेत की निकासी के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। इन सभी खदानों को विभाग द्वारा तीन यूनिट में विभाजित किया गया है। पहली बोली में तीनों यूनिट ही बिक गई थी। जिसके तहत विभाग ने राहत की सांस ली थी। लेकिन इसमें यूनिट नंबर एक को जिस ठेकेदार ने लिया था। उसने एग्रीमेंट साइन नहीं किया। लिहाजा इस यूनिट की बिक्री नहीं हो सकी। खनन विभाग चंडीगढ़ मुख्यालय से माइनिंग इंजीनियर आरके शर्मा चेयरमैन की कमेटी में डीआईसी महाप्रबंधक आरके राणा, डीईटीसी सेल्सटैक्स, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी डीएफओ ओपी काजला मौजूद रहे।

इनजगहों पर अधिकृत माइनिंग : विभागयूनिट एक में बेगा, घसौली, पबनेरा चंदोली को शामिल किया गया है। जबकि यूनिट दो में ग्यासपुर, रसूलपुर, मिमारपुर, टिकोला, जैनपुर, बख्तावरपुर, मछरोली, असदपुर, नादंनौर, बापौली, पलड़ा, मिरकपुर, जाजल दीपालपुर शामिल हैं। जबकि यूनिट नंबर तीन में खुरमपुर, बाकीपुर, पबसरा और मनौली शामिल हैं।

^दो बार एक ही यूनिट की बोली नहीं हो सकी है। कारणों का सही सही पता नहीं चल पा रहा है। लेकिन अब सर्वे कराया जाएगा आखिरकार किस कारण से इस यूनिट की बोली नहीं लगाई जा रही है। साथ ही उच्च अधिकारियों से भी विचार विमर्श किया जाएगा।\\\'\\\' आरएसठाकरान, असिस्टेंसमाइनिंग इंजीनियरिंग, सोनीपत।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि दिसंबर में जब बोली हुई थी तो यूनिट नंबर एक 71.25 करोड़ में नीलाम हुआ था। लेकिन ठेकेदार ने एग्रीमेंट साइन किया। जिसके कारण इसे दोबारा से मंगलवार को सेल करने के लिए खुली बोली लगाई गई। पिछली बोली से इसका दाम 25 प्रतिशत कम कर दिया गया। जिसके तहत अब इसका रिजर्व प्राइस 53.25 करोड़ कर दिया गया। बावजूद इसके कोई खरीदार नहीं आया। अधिकारियों का कहना है कि अब बोली से पहले उच्च अधिकारियों से डिस्कस की जाएगी।