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जिन्होंने अधिक गृहकर दिया था वो होगा वापस

7 वर्ष पहले
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पिछलेसाल जिन लोगों ने पुराने रेट के हिसाब से ज्यादा हाउस टैक्स दिया था, अब उनके अतिरिक्त पैसे वापस होंगे। इसके लिए पिछले साल जारी हाउस टैक्स नोटिफिकेशन में भी संशोधन किया गया है।

नगर निकाय विभाग के प्रधान सचिव पी राघवेंद्र ने सभी संबंधित को इस बारे में पत्र जारी कर दिया है। विभाग की अधिसूचना में वित्तायुक्त ने साफ किया है कि नगर पालिका अधिनियम 1994 की धारा 149 की उपधारा के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल की अनुमति के बाद प्रॉपर्टी टैक्स पॉलिसी में संशोधन किया है।

अब जिन गृहकर-दाताओं ने कर ज्यादा जमा करा दिया है, वे अपनी एडवांस राशि वापस ले सकते हैं और इसके लिए पत्र भी जारी किया है।

सरकार ने 2011-12 2012-13 का बकाया गृहकर 31 मार्च 2014 तक जमा कराने पर 30 प्रतिशत छूट, 2014-15 का गृहकर 31 जुलाई तक जमा कराने पर 10 फीसदी की छूटी दी। इसके चलते टैक्स जमा कराने वालों का तांता लग गया तो नप को करीब चार करोड़ वसूलने में कामयाब रहा।

हुड्डा सरकार के कार्यकाल में गृहकर पॉलिसी तीन बार बदल चुकी है। जून माह 2012 में नई नीति से कॉमर्शियल प्रॉपर्टी टैक्स तीन गुणा तक बढ़ गया। इस पर विरोध में व्यापारी सड़कों पर उतर आए। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा। सीएम ने लोक निर्माण विभाग के मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला के नेतृत्व में विशेष कमेटी का गठन किया। पांच सदस्यीय कमेटी ने अक्टूबर 2013 में कलेक्टर रेट खत्म करके सेल्फ असेस्मेंट पॉलिसी लागू की। जिसके तहत पहले जहां 250 वर्ग गज तक के प्लाट तक एक रुपए, इससे ऊपर कलेक्टर रेट गुणा में के हिसाब से गृहकर लगाया, लेकिन सेल्फ असेस्मेंट पॉलिसी के तहत सीधा 75 पैसे प्रति वर्ग गज के हिसाब से गृहकर जमा कराने का प्रावधान रखा था। साथ ही 301 से 500 वर्ग गज तक 3 रुपए, 500 से 1000 गज तक 4.50 रुपए, 1001 वर्ग गज से दो एकड़ तक 5.25 रुपए 2 एकड़ से ऊपर के मकान पर 7.50 रु. प्रति वर्ग गज प्रोपर्टी टैक्स तय किया गया। नई पॉलिसी से शहर के 80 प्रतिशत मकान मालिकों को फायदा हुआ, क्योंकि ज्यादातर मकान 100 से 300 वर्ग गज तक के हैं।

सेल्फ असेस्मेंट पॉलिसी के तहत करदाता को पता है तो उसका कितना टैक्स बनता है और उसने कितना जमा कराया है। अगर ज्यादा राशि जमा हुई है तो वह अतिरिक्त राशि बिना ब्याज लेने के लिए आवेदन कर सकता है। गृहकर शाखा की टीम मौके पर जाकर जां