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भागवत कथा जीवन जीने की कला : दिव्यानंद

7 वर्ष पहले
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माॅडलटाउन स्थित दिव्य कुटीर में श्रीमद भागवत गीता जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित गीता प्रवचन में डॉ. स्वामी दिव्यानंद महाराज भिक्षु ने कहा कि भागवत कथा जीवन जीने की कला है। उन्होंने कहा कि अगर नियमित रूप से गीता का पाठ किया जाए तो निश्चित रूप से जीवन में सब कुछ ठीक हो जाए। क्योंकि इससे जीवन में आने वाली व्याधियों स्वत: ही समाप्त हो जाती है।

उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र में खड़े अर्जुन को धर्म और अधर्म में फर्क नजर नहीं रहा था। जिसके कारण वह शस्त्र छोड़कर भगवान कृष्ण के समक्ष नत मस्तक हो गए। भगवान कृष्ण ने उन्हें धर्म और अधर्म से अवगत कराया। यह केवल अर्जुन के लिए नहीं बल्कि समूचे संसार के लोगों के लिए हैं। जीवन में खुशी और गम आता जाता रहता है, लेकिन जो सदमार्ग पर होता है, वह बुरी आदतों के दलदल से निकल जाता है। जबकि कुमार्ग पर चलने वाला इसके भंवर से कभी निकल नहीं पाता है।