- Hindi News
- गुरु गोबिंद सिंह उनके बेटों की शहादत को कभी नहीं भूलेगा हिंदुस्तान
गुरु गोबिंद सिंह उनके बेटों की शहादत को कभी नहीं भूलेगा हिंदुस्तान
सिखोंके 10वें गुरु गोबिंद सिंह जी की उनके परिवार की शहादत को हिंदुस्तान कभी नहीं भूल पाएगा। गुरु गोबिंद सिंह दो बेटों अजीत सिंह झंझार सिंह 1704 ईसवी में चमकौर में मुगलों को करारा जवाब देते हुए शहीद हो गए थे। उस समय इन दोनों भाईयों की उम्र मात्र 17 और 15 साल थी। जिससे मुगल शासक बुरी तरह से बौखला गया और उनके दो किशोर बेटों को जिंदा ही दीवार में चुनवा दिया था। हिंदुस्तान इन बहादुरों का सदैव सम्मान करेगा। इन शहादतों को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
सेक्टर 15 स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर में रविवार को सालाना कीर्तन समागम का आयोजन किया गया। यह समागम गुरु गोबिंद सिंह के चारों साहबजादों को समर्पित था। कीर्तन दरबार में रागी सिंह भाई बलप्रीत सिंह, सरबजीत सिंह एवं भाई हरजिंदर सिंह श्रीनगर वाले ढाडी जत्था ज्ञानी तरशेम सिंह ने श्रोताओं को गुरु के इतिहास से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह ने अपने जीवन काल में हिंदू धर्म की रक्षा के लिए बहुत संघर्ष किया। मुगलों से अंतिम क्षण तक अपने बेटों के साथ लड़ते रहे। मुगल सल्तनत को स्वीकार नहीं किया। उसने इस्लाम कबूले करने के लिए उनके दो बेटों को उनके सामने ही दीवार में चुनवा दिया, लेकिन उन्होंने उफ तक नहीं की और हंसते हंसते वतन और धर्म के नाम पर शहादत को कबूल कर लिया। कार्यक्रम सुबह 10 बजे से शाम साढ़े चार बजे तक भंडारे के साथ चला। जिसमें प्रदेश सरकार में मंत्री कविता जैन, फेडरेशन के प्रधान हरचरण सिंह, पूर्व प्रधान गुरिंदर सिंह, सचिव अमित सिंह परमजीत सिंह आदि मौजूद रहे।