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गैस एजेंसी की नहीं अब ग्राहकों की चलेगी मर्जी

6 वर्ष पहले
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आनेवाले दिनों में गैस एजेंसियों की मनमानी पर अंकुश लगने वाला है। सरकार द्वारा ऑयल कंपनियों को निर्देश है कि वह उपभोक्ताओं को स्वच्छंद माहौल मुहैया कराएं। इसके तहत कई विषयों पर बदलाव की वकालत शुरू कर दी गई है। सबसे जरूरी उपभोक्ताओं से जुड़ी रसोई गैस की आपूर्ति है। इसके तहत आॅयल कंपनियों ने एजेंसियों को नहीं बल्कि उपभोक्ताओं को वरीयता देने पर कार्य शुरू कर दिया है। एक अप्रैल से इलाका वाइज गैस एजेंसी की बाध्यता खत्म हो जाएगी। जिसमें उपभोक्ता जिस भी एजेंसी से चाहेगा उसी से रसोई गैस कनेक्शन ले सकेगा। संबंधित एजेंसी को उस पते पर आपूर्ति भी करनी होगी। हालांकि इसके कार्य करने के तरीकों पर अभी होमवर्क हो रहा है। इंडियन ऑयल के वरिष्ठ अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक ऑयल कंपनियों द्वारा केवाईसी शुरू कर बड़े पैमाने पर फर्जी उपभोक्ताओं को रोका गया है। हालांकि अब भी फर्जीवाड़ा हो रहा है। जिससे निपटने के लिए कंपनियों द्वारा रूपरेखा तैयार की जा रही है।

नईव्यवस्था : इंडियनऑयल कारपोरेशन लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक वित्त वर्ष 2015-16 में उपभोक्ताओं को सुविधा प्रदान की जाएगी। इसके तहत उपभोक्ताओं को अगर लगता है कि इंडियन ऑयल की सर्विस ठीक नहीं है, तो वह भारत गैस से सेवा ले सकता है। इसके लिए गैस एजेंसियों के लिए बनाया गया इलाके का तिलिस्म भी टूटेगा। इससे उपभोक्ताओं को अपनी मर्जी से एजेंसी चुनने का अधिकार मिलेगा।

^इंडियन ऑयल कारपोरेशन द्वारा उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करने के लिए तरह तरह के प्रयोग किए जा रहे हैं। गैस एजेंसी बदलने की स्वच्छंदता से एजेंसी संचालकों की कार्य प्रणाली में पारदर्शिता आएगी। हालांकि यह अभी प्रॉसेस में है। लेकिन इससे काफी हद तक ऑयल कंपनियों को फायदा मिलेगा।\\\'\\\' प्रदीपकुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक इंडियन ऑयल कारपोरेशन लिमिटेड, नई दिल्ली।

जिले में करीब दो लाख 24 हजार रसोई गैस के उपभोक्ता हैं। जिन्हें हर दिन 16 रसोई गैस एजेंसियों के माध्यम से गैस की आपूर्ति की जाती है। इनमें अधिकतर उपभोक्ताओं की शिकायत रहती है कि अमुक गैस एजेंसी से होने वाली आपूर्ति से वह संतुष्ट नहीं है। लेकिन विकल्प नहीं होने के कारण वह उसी से सेवा लेने को विवश है। लेकिन अब समझौता करने से निजात मिलने की प्रबल संभावना है।

ऑयल कंपनियों द्वारा उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा प्रदान करने के लिए गैस एजेंसियों को समय समय पर आदेश निर्देश जारी किया जाता है। जिसके तहत करीब दो सालों से गैस एजेंसियों की मानिटरिंग भी की जा रही है। इसमें एजेंसियों को परफार्मेंश पर रेटिंग की जाती है, जिससे मार्केट वैल्यू उसकी खराब होती है। लेकिन एजेंसी संचालकों ने इसकी बिना परवाह किए ही अपना काम पुराने ढर्रे पर जारी रखा है। जिसके तहत अब कंपनियों की ओर से इन पर अंकुश लगाने के लिए नई कवायद शुरू की जा चुकी है।