सच में: जिद के आगे जीत है
बीटेककी पढ़ाई में जिले के हजारों युवाओं का परीक्षा परिणाम हर वर्ष डांवाडोल रहता है। हर समेस्टर में कईयों की कम्पार्टमेंट आती है और कई विद्यार्थी तो परेशान होकर पढ़ाई ही छोड़ देते हैं। घटिया परीक्षा परिणाम से जहां कालेज बंद हो रहे हैं वहीं इंजीनियरिंग से युवाओं का मोह भी भंग हो रहा है। परंतु ऐसे विद्यार्थियों के सामने हुडा इस्टेट कार्यालय में कार्यरत एएसडीई देवेंद्र मलिक, बीएंडआर में कार्यरत एसडीओ मंजीत एचएसआईआईडीसी बड़ी में कार्यरत सीनियर मैनेजर कुलबीर ने मिसाल कायम की है। इन तीनाें में से दो ने 50 की उम्र में एक ने 48 साल की उम्र में एमटेक सिविल इंजीनियर की डिग्री प्राप्त की है। देवेंद्र मलिक ने प्रथम श्रेणी से एमटेक की डिग्री पाई है। इसके साथ छह समेस्टर में उनकी कभी री-अपीयर नहीं आई। देवेंद्र ने बताया कि उनकी पढ़ाई की भूख शांत नहीं हुई है अब वह सिविल इंजीनियरिंग में पीएचडी में एडमिशन की तैयारी में है।
12 साल पढ़ाई छोड़ने के बाद की एमटेक
हुडाइस्टेट कार्यालय में एएसडीई देवेंद्र मलिक ने बताया कि उसने 1988 में नौकरी ज्वांइन की थी। परंतु बीच में पढ़ाई छूट जाने का उसे मलाल रहा। करीब 12 साल पढ़ाई छोड़े जाने के बाद एक दिन उसके मन में दोबारा पढ़ाई करने का विचार आया। उसने पढ़ाई शुरू की। दिन में नौकरी करने के साथ उसने सुबह रात को समय निकालकर करीब आठ-आठ घंटे पढ़ाई की। इस कार्य में उसका बेहतर गाइड धीरेंद्र सिंह प्रवीण ने साथ दिया। उन्होंने कहा कि पढ़ाई करने के लिए समय निकालना बेहद जरूरी है। साथ ही बेहतर गाइड भी होना चाहिए। मेहनत अच्छी टेक्नीक से बीटेक एमटेक की पढ़ाई आसान हो जाती है। आज के युवा पढ़ाई को कम समय देते हैं। जिससे उनकी हर समेस्टर में रि-अपीयर आती है।
देवेंद्र मलिक