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सेवा का भाव रखना ही ईश्वर की भक्ति : रंजीत
जितनेशिद्दत से ईश्वर को पाने के लिए मंदिर और मस्जिदों के चक्कर लगाते हैं, उससे आधा भी अगर इंसानों की सेवा को समय लगाएं तो ईश्वर स्वयं चलकर आपके पास आएगा और पूछेगा कि क्या चाहते हो।
उक्त बातें रविवार को आयोजित संत निरंकारी मंडल सत्संग में रंजीत सिंह ने कहीं। उन्होंने कहा कि संत निरंकारी मिशन का उद्देश्य परोपकार और निराकार ब्रह्म की उपासना का है, ताकि इंसानों से इंसान प्यार कर सके। जो ईश्वर की सच्ची भक्ति है। सत्संग में जाने से भला नहीं होने वाला है, बल्कि सत्संग की बातों को जीवन में उतारने से कुछ भला हो सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि संत निरंकारी बाबा हरदेव महाराज ने सदैव इंसानों की सेवा को ही सर्वोपरि माना है। इंसान के अंदर ही राम और रावण दोनों विराजमान है। इसलिए आवश्यक है कि अपने अंदर की अंतरात्मा का पहचानें की वह क्या चाहती है। जिससे स्वयं का और समाज का भला किया जा सकता है। इंसान पूरे जीवन धन की आकांक्षा में व्यतीत कर देता है, लेकिन अपने साथ एक फूटी कौड़ी नहीं ले जा सकता है। लेकिन वह जीवन में जो परोपकार कर जाता है, वहीं उसके जीवन के साथ और जीवन के बाद भी जाता है। रंजीत सिंह ने कहा कि संत निरंकारी के उद्देश्यों का पालन करने वाले लोग समाज की दिशा और दशा दोनों बदल सकते हैं।