सोनीपत। जिला मुख्यालय स्थित 102 एम्बुलेंस इमरजेंसी हेल्पलाइन सेवा शुक्रवार रात 10 बजे से लेकर शनिवार देर शाम तक डैड पड़ी रही है। टोल फ्री हेल्पलाइन सेवा डैड होने से मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
हेल्पलाइन सेवा ठीक कराने के प्रति अधिकारियों की बेरुखी भी देखने को मिली। रात को अचानक ठप हुई फोन लाइन सेवा शनिवार सुबह तक ठीक नहीं करवाई गई थी। हेल्पलाइन ठीक करने के लिए अस्पताल की तरफ से शनिवार की सुबह शिकायत बीएसएनएल को की गई। लेकिन शनिवार का पूरा दिन बीत गया, लेकिन हेल्पलाइन सेवा डैड रही। टोल फ्री 102 हेल्पलाइन के साथ लैंडलाइन सेवा भी मरीजों को राहत नहीं दे सकी। दो लैंडलाइन हेल्पलाइन सेवा भी टोल फ्री 102 की तरह डैड थी।
प्राइवेटवाहन एम्बुलेंस चालकों की रही मौज : 102टोल फ्री नंबर डैड होने से प्राइवेट वाहन चालकों निजी एम्बुलेंस चालकों की खूब मौज रही। मरीजों को जाे सेवा फ्री में मिलनी थी, उसके लिए उन्हें एक हजार से पंद्रह सौ रुपए खर्च करके अस्पताल आना घर जाना पड़ा। वहीं कई मरीज जो यह भुगतान नहीं कर सकते थे वह बस अन्य साधनों से अस्पताल पहुंचे।
102के अलावा तीन हेल्पलाइन और, पर जानकारी नहीं : इमरजेंसीउपचार सुविधा के लिए सामान्य अस्पताल में टोल फ्री नंबर 102 के अलावा तीन हेल्पलाइन और दी गई हैं। परंतु इन हेल्पलाइन की लोगों को बहुत कम जानकारी है। अस्पताल के अलावा यह हेल्पलाइन अन्य जगह कम ही लिखी दिखती है। तीन हेल्पलाइन नंबर हैं- 0130-2233102 , 2234102, 8295930102। सूत्रों ने बताया कि तीन हेल्पलाइन बंद होने से मरीज
मोबाइल की सेवा पर ही कॉल कर पाए। पूरा दिन में करीब 20 कॉल मोबाइल पर आई। जबकि अन्य तीन हैल्पलाइन पूरा दिन बजती रहती हैं।
निर्माण के दौरान कटी लाइन : पूछताछ करने पर पता चला कि हेल्पलाइन सेवा में कोई फाल्ट नहीं है। लाइन अस्पताल के अंदर ही जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने निर्माण कार्य करते समय काट दी। अस्पताल में जनस्वास्थ्य विभाग पेयजल के लिए निर्माण कार्य कर रहा है।
'' हेल्पलाइन खुदाई के दौरान शुक्रवार रात को काटी गई है। शिकायत शनिवार की सुबह मिली है जल्दी ही लाइन को ठीक किया जाएगा।'' -
वाईके त्यागी, एजीएम बीएसएनएल।
''अस्पताल में ट्रेनिंग सेंटर के पास जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने निर्माण कार्य करते समय लाइन काट दी। जिससे टोल फ्री 102 अन्य दो सेवा बंद हो गईं। लाइन ठीक करने के लिए शिकायत बीएसएनएल को शनिवार की सुबह कर दी है। जल्दी ही लाइन को ठीक करवाया जाएगा।''’
डॉ. महेंद्र,डिप्टी सिविल सर्जन।
लैंडलाइन दो हेल्पलाइन भी नंबर भी डैड, करीब 10 घंटे बाद शिकायत : सामान्य अस्पताल स्थित 102 एम्बुलेंस कंट्रोल रूम में इमरजेंसी सेवा के लिए 65 से 70 कॉल आती हैं। इनमें गर्भवती को अस्पताल पहुंचाने के लिए, दुर्घटना की अन्य इमरजेंसी कारणाें की कॉल शामिल होती हैं, लेकिन 22 घंटे 102 हेल्पलाइन डैड रहने से जरूरत मंद मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्हें प्राइवेट वाहनों से अस्पताल से आते जाते देखा गया। जिससे उनकी खूब जेब ढीली हुई।
- किसी भी आपातकालीन स्थिति में सरकारी अस्पताल जाने के लिए मुफ्त एंबुलेंस
- गर्भवती महिलाओं और बीमार नवजात शिशुओं के लिए मुफ्त एंबुलेंस
- महिलाओं की डिलीवरी के बाद और बीमार नवजात शिशुओं को वापस घर छोड़ने के लिए मुफ्त सेवा।
- आपातकालीन स्थिति में निजी अस्पताल जाने के लिए सात रुपए प्रति किलोमीटर के भुगतान पर उपलब्ध।