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भारत आकर बदली सोच, संस्कृति ने दिल को छुआ

6 वर्ष पहले
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भारतके बारे में सोच थी कि यहां महिला उत्पीडन अधिक है। उन्हें बराबरी का हक नहीं मिलता। शिक्षा का ढाचा भी पटरी पर नहीं है, लेकिन यकीनी तौर पर कहें ऐसा बिल्कुल नहीं है। छात्राओं को पढ़ाई ही नहीं अन्य गतिविधियों में सक्रियता से भाग लेते हुए देखना सुखद है। यह बदलाव हौलेंड से आए एक शैक्षणिक प्रतिनिधमंडल ने महसूस किया है। इस दल में प्रिंसिपल एवं शिक्षक सहित 12 विद्यार्थी शामिल है। यह दल यहां ऋर्षिकुल विद्यापीठ स्कूल में कल्चर एक्सचैंज प्रोग्राम के अंतर्गत पांच फरवरी से सोनीपत में हैं। सोमवार को यह दल मीडिया से रूबरू हुआ।

सोनीपतके विद्यार्थियों के यहां रहे हैं डच स्टूडेंट: डचस्टूडेंट स्कूल के हास्टल में नहीं बल्कि स्कूल में पढ़ रहे विद्यार्थियों के घर में रह रहे हैं। इससे वे बेहद खुश है। विद्यार्थियों का कहना है कि इससे हमें भारतीय संस्कृति में रहना, परिवार में एक-दूसरे के प्रति लगाव का सुखद अनुभव होता है।

गांवमें जाएंगे, खेलेगे और नाचेंगे भी : विदेशीशैक्षणिक प्रतिनिधिमंडल सिर्फ स्कूल परिसर में एक-दूसरे की शिक्षा पद्धति को ही नहीं समझ रहे बल्कि हरियाणवी संस्कृति से रूबरू होने को भी तैयार है। स्थानीय शादी में मेहमानवाजी का आनंद ले चुके ये लोग 11 फरवरी को वे गांव कुराड में जाकर गांव का रहन-सहन देखेंगे। 12 को बास्केटबाल मैच खेलेंगे तथा अगले दिन फुटबाल मुकाबला होगा। 14 फरवरी को वे भारतीय गीतों पर नृत्य भी करेंगे।

कल्चरएक्सचेंज का लाभ: डचके कोलियर कॉलेज के प्रिंसिपल रेमेंड ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन से आत्मविश्वास बढ़ता है। जैफरी,ब्रेम,नौवा,हिडे हैदी ने कहा कि यहां से काफी कुछ सीख कर जा रहे हैं। वहीं इस कल्चर एक्चेंज प्रोग्राम के संयोजक धीरज शर्मा अर्चना शर्मा ने बताया कि अगले सत्र से बच्चों को आई पैड पर पढ़ाई करवाएंगे। संचालक एसके शर्मा, पीआर मोहनन,जगदीश शर्मा वंदना शर्मा ने खुशी जाहिर की।

सोनीपत . हौलेंडसे ऋर्षिकुल विद्यापीठ में पहुंचे शैक्षणिक दल के सदस्य।