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फंड के इंतजार में ड्रेन छह के जीर्णोद्धार का समय निकला
शहरके बीच से गुजरने वाली गंदगी से लबालब ड्रेन नंबर छह का जीर्णोद्धार के प्रोजेक्ट को झटका लगा है। इसके लिए अप्रूव्ड टेंडर को धन के अभाव में निरस्त कर दिया गया है।
इसके जीर्णोद्धार को लेकर 23 जून को टेंडर हुआ था, जिसे 29 जून को कादियान कंस्ट्रक्शन कंपनी को 24-24 लाख रुपए के दो टेंडर अलाट हुए थे। सिंचाई विभाग के सुपरविजन में यह कार्य डिपॉजिट वर्क के तहत होना है। अलाटमेंट के बाद होने वाले एग्रीमेंट के 45 दिन के भीतर निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। जिसे अब करीब पांच महीने से अधिक समय बीत चुका है। फंड के अभाव में यह कार्य आज तक शुरू नहीं हो सका है। ठेकेदार का कहना है कि इसकी वजह से उसका नुकसान भी हुआ है।
सिंचाई विभाग के अधिकारिक सूत्रों की मानें तो ड्रेन नंबर छह के कायाकल्प का प्रोजेक्ट दो चरणों में पूरा होना था। इसके लिए पहले 48 लाख रुपए से इसकी सफाई होनी थी। गंदगी मुक्त बनने के बाद दूसरे चरण में इसकी दीवारें बनाकर रेलिंग लगाई जानी थी। यह प्रोजेक्ट 28 करोड़ का तैयार किया गया, लेकिन दूसरा प्रोजेक्ट अभी तक अप्रूव्ड तक नहीं हुआ है। जबकि सफाई कार्य की तो अप्रूवल मिल गई, लेकिन आज तक फंड नहीं मिला।
सिंचाई विभाग के मुताबिक कामी रोड से आईटीआई स्थित ड्रेन छह को सफाई के बाद करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबी ड्रेन के दोनों तरफ दीवार खड़ी की जाएगी। तत्कालीन डीसी समीर पाल सरो ने इसी के ऊपर रेहड़ी मार्केट को शिफ्ट कराने का प्रोजेक्ट तैयार किया था। वहीं दूसरा इस्टीमेट नगर परिषद सोनीपत के दायरे में ड्रेन की सफाई का बनाया गया, लेकिन यह योजना कागजों में सिमट कर रह गई हैं।
ड्रेन नंबर-6 के प्रोजेक्ट को यदि मंजूरी मिलती तो शहर को बड़ा लाभ होता। इक तरफ जहां रेहड़ी हटने से शहर के बाजार से जाम अतिक्रमण दूर होता तो वहीं नाले की बदबू से परेशान करीब आठ कॉलोनियों के हजारों लोगों को साफ वातावरण मिल जाता। ड्रेन नंबर छह लंबे समय चुनाव के दौरान नेताओं के बीच मुद्दा बनती रही है पर समाधान कोई नहीं करा पाया। इसके पक्का होने मुद्दा समाप्त हो जाता और जो नहरी विभाग की जमीन कब्जाई जा रही है वह भी बच जाती।
सिंचाई विभाग के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक ड्रेन की सफाई के लिए 24-24 लाख के दो टेंडर जून महीने में ही लगाए गए थे। जिसे एक ही कांट्रेक्टर को दिया गया। यह कार्य अलाटमेंट के बाद होने वाले