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ढहने के कगार पर पहुंचा पृथ्वीराज चौहान का किला

7 वर्ष पहले
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पृथ्वीराजचौहान का किला जो कभी अपनी शान के लिए पूरे देश में मशहूर हुआ करता था और प्रशासन की अनदेखी के चलते लगातार खंडहर में तबदील हो रहा है। आज स्थिति यह है कि इस किले का मुख्य द्वार भी ढहने की स्थिति में गया है और जिस दिन इस द्वार का कोई बड़ा टुकड़ा टूट कर गिरा तो उस दिन एक बड़ा हादसा होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि किले के इसे मुख्यद्वार के नीचे दर्जनों लोग दिनभर बैठक या तो ताश खेलते है। इससे पहले भी कई गेट के कई छोटे टुकड़े टूट कर गिर चुके हैं, लेकिन जब भी गिरे रात के समय गिरे जिसके चलते कोई दुर्घटना घटित नहीं हुई।

लोग ने की किले को रिपेयर करने की मांग

देखरेखके अभाव में लगातार जर्जर हो रहे इस किले की रिपेयर की मांग शहर के लोगों द्वारा लगातार की जाती रही है, लेकिन जिला प्रशासन पुरातत्व विभाग ने कोई ध्यान इस ओर नहीं दिया। हालांकि यह किला प्रदेश देश के अन्य किलों की तरह महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह इस देश के आखिरी हिंदू शासक पृथ्वी राज चौहान की निशानी है और यदि इस किले के भीतर ही पृथ्वी राज चौहान का स्मारक बनाया जाए तो तरावड़ी में सलानी तो बढ़ेंगे ही इसके साथ ही सरकार को राजस्व का भी लाभ होगा।