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रेस्क्यू के लिए 300 उड़ानों से भेजे गए 150 जवान, सामान

5 वर्ष पहले
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हनुमनथप्पा कोमा में हैं। लीवर और किडनी ठीक से काम नहीं कर रहे। आश्चर्य की बात है कि बर्फ की दीवार के नीचे दबे रहने के बावजूद उन्हें ही हड्‌डी में चोट आई है, ही बर्फ से होनेवाला फ्रॉस्ट बाइट का कोई घाव है। वो वेंटीलेटर पर हैं। शरीर के ठंडे पड़ चुके अंगो में दोबारा ब्लड फ्लो किया गया है।

सेना के मुताबिक पिछले सात दिनों में चीता, चेतक और ध्रुव हेलिकॉप्टर ने 300 से ज्यादा उड़ाने भरकर बर्फ काटने की मशीनें, डॉक्टरों की टीम, स्निफर डॉग्स, टेंट समेत सभी जरूरी साजो-सामान ग्लेशियर तक पहुंचाए। इसमें थर्मल इमेजर और डीप पेनीट्रेशनल रडार भी शामिल थे। ये रडार 20 फीट नीचे की गर्माहट भी पहचान सकते हैं। टीम के पास रेडियो सिगनल डिटेक्टर भी थे। फिर भी ऑपरेशन में दिक्कतें रही थीं। लगातार बर्फबारी और ऑक्सीजन नहीं के बराबर। दिन में तापमान माइनस 25 और रात को माइनस 50 तक पहुंच जाता। ले. जनरल पटयाल के मुताबिक वहां किसी के लिए लगातार 10 मिनट से ज्यादा काम करना मुमकिन नहीं है। सांसें फूलने लगती है। इसलिए टीम का हर जवान रोटेशन में काम कर रहा था। सर्च करने के साथ ही सेना ने वहां बर्फ की चपेट में आई पोस्ट को भी दोबारा ऑपरेशनल कर दिया है। इसे खाली नहीं छोड़ा जा सकता। दुश्मन की सीधी निगाह है। पाकिस्तान तो यहां रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद करने का प्रस्ताव भी दे चुका था। पर भारत ने इससे इंकार कर दिया। पोस्ट अब पहले की तरह किसी भी चुनौती के लिए तैयार है।

मोदी ने हनुमनथप्पा से मुलाकात कर की प्रार्थना

प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने जीवन के लिए संघर्ष कर रहे बहादुर सैनिक हनुमनथप्पा से अस्पताल जाकर मुलाकात की और देश से उनके जल्द स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रार्थना करने को कहा। ग्लेशियर से दिल्ली आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रेफरल लाया गया और अस्पताल के अनुसार वह कोमा में हैं और उनकी हालत अत्यंत गंभीर है।

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