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केंद्र के विज्ञापन में पीएम की फोटो हो सकती है तो हरियाणा के विज्ञापन में सीएम की क्यों नहीं

7 वर्ष पहले
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केंद्रसरकार द्वारा जारी थर्मल प्लांट के विज्ञापन में पीएम (नरेंद्र मोदी) उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी मेट्रो के विज्ञापन में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की फोटो हो सकती है तो फिर हरियाणा सरकार के विज्ञापन में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की तस्वीर क्यों नहीं हो सकती।

हरियाणा सरकार द्वारा जारी विज्ञापनों को पार्टी के प्रचार का माध्यम पब्लिक मनी बर्बादी करार देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने यह जवाब पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल किया। हरियाणा सरकार के इंफरमेशन, पब्लिक रिलेशन विभाग के डायरेक्टर जनरल की तरफ से यह जवाब दायर किया गया। जवाब में कहा गया कि याची ने प्रचार पाने के लिए याचिका दायर की है। याची के मुताबिक हरियाणा सरकार ने वर्ष 2013-14 के लिए 113 करोड़ रुपए मंजूर किए जबकि यह सही नहीं है। विधानसभा में जब इसके लिए प्रस्ताव लाया गया था तो राशि में कटौती कर इसे 51.84 करोड़ कर दिया गया। साथ ही यह भी बताया गया कि सरकार द्वारा विज्ञापनों पर पूरे वर्ष में भी इस राशि को खर्च नहीं किया गया। प्रिंट मीडिया को जहां 12.27 करोड़ के विज्ञापन दिए गए वहीं इलेक्ट्रो निक मीडिया को 18.27 करोड़ के विज्ञापन दिए गए। सभी माध्यमों में दिए गए विज्ञापनों का कुल खर्च 33.11 करोड़ रुपए रहा। इसके अलावा 2014-15 के लिए सरकार ने विज्ञापनों का बजट 62.5 करोड़ रखा है। साथ ही हरियाणा सरकार ने याची की बात को सिरे से नकारते हुए कहा कि याची ने हरियाणा सरकार के समक्ष कोई रिप्रेजेंटेशन या शिकायत नहीं दी है। ऐसे में याचिका पर जनहित में सुनवाई की जाए। जवाब में कहा गया कि सरकार द्वारा जारी विज्ञापन उपलब्धियों, पॉलिसी तथा जनहित में जारी किए गए। ऐसे में पार्टी या किसी व्यक्ति विशेष को प्रमोट नहीं किया गया है। सरकार द्वारा दो विज्ञापनों की प्रति हाईकोर्ट में पेश की गई। एक विज्ञापन यूपी सरकार का है जिसमें मेट्रो के यूपी में आने का विज्ञापन था जिसमें वहां के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की फोटो लगाई गई थी, वहीं दूसरा विज्ञापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का था। केंद्र सरकार के द्वारा थर्मल प्लांट के लिए जारी विज्ञापन में नरेंद्र मोदी की फोटो दिखाता विज्ञापन दिखाया गया। हाईकोर्ट ने इस पर मामले की सुनवाई 15 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी।