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लाठी-टार्च लेकर किसान बने चौकीदार

6 वर्ष पहले
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शाम होते ही हाथों में बैट्री, लाठी लेकर दर्जनों लोग खेतों की तरफ जाते दिखाई देते हैं। जाने वाले ये सभी किसान होते हैं जो अपनी फसल को रात में आवारा पशुओं से बचाने के लिए चौकीदार की तरह पहरा देते हैं।

फसल को बचाने के लिए किसान कर रहे हैं हजारों खर्च

घुमंतू पशुओं से फसल को बचाने के लिए किसान हजारों रुपए खर्च कर रहे हैं। खेतों के चारों तरफ लोहे के कांटेदार तार लगाने पड़ रहे हैं। एक एकड़ पर कांटेदार तार लगाने के लिए किसान को चार हजार से छह हजार रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं।

खेत में आते हैं दर्जनों पशु

किसानों ने बताया कि खेत में दर्जनों पशु एक साथ जाते हैं। जिस खेत में घुमंतू पशुओं का टोल चला जाता है वहां फसल को तहस-नहस कर देता है। रात को तो माइनरों से खेतों की तरफ जाने वाले रास्तों पर कांटेदार झाड़ी तक लगाते हैं ताकि पशु खेतों में जा सकें।

उचाना. घुमंतूपशुओं से फसल को बचाने के लिए खेतों में पहुंचे किसान खेतों में बने कमरे में रात को अलाव जला कर सर्दी को दूर भगाने का प्रयास करते किसान।

हजारों खर्च के बाद भी फसल सुरक्षित नहीं

खेतमें घुमंतू पशुओं से फसल को बचाने के लिए कांटेदार तार खेत के चारों तरफ लगाने के बाद भी फसल सुरक्षित नहीं है। फसल को पशुओं से बचाने के लिए पूरी रात खेत में गुजारनी पड़ रही है। एक रात अगर खेत में किसी कारण से नहीं जाए पाए तो फसल को घुमंतू पशुओं के चलते नुकसान हुआ मिलता है। -सुरेंद्र श्योकंद, किसान

बरसीन की फसल तहस-नहस की

^रातको खेत में पहरा देने के दौरान कुछ देर आंख लग गई। जब देख तो खेत में पशुओं का टोल चुका था। यहां लगाई गई बरसीन की एक एकड़ के करीब फसल को तहस-नहस किया हुआ था। रात को पहरा देने के बाद भी फसल घुमंतू पशुओं से बच नहीं पा रही है। इस साल पशुओं की संख्या बीते कई सालों से अधिक है। प्रशासन को घुमंतू पशुओं से छुटकारा दिलाना चाहिए।\\\' -सुनीलश्योकंद, किसान