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नारी शिक्षा के लिए लगाया पौध बना वट वृक्ष

6 वर्ष पहले
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आजसे करीब 16 साल पहले नारी शिक्षा के महत्व को जानते हुए स्वामी गणेशानंद महाराज द्वारा रेलवे रोड पर महिला कॉलेज की शुरुआत की गई। यहां लोगों के सहयोग से लड़कियों के लिए दो मंजिला स्पेशल महिला कॉलेज बनाया गया। शुरुआत में यहां 265 छात्राएं शिक्षा ग्रहण करने पहुंची। अभिभावकों का भी साल दर साल बेटियों की शिक्षा के प्रति रुझान बढ़ा तो यहां बेटियों की संख्या बढ़ कर 650 तक पहुंची। आज यहां आस-पास के 24 गांवों से छात्राएं शिक्षण ग्रहण करने पहुंच रही हैं।

जब यहां कक्षाएं शुरू हुई तो उस समय कॉमर्स आर्ट्स की कक्षाएं शुरू हुई थीं। अब यहां पर बीए, बीकॉम, बीसीए, बीबीए की कक्षाएं लग रही हैं। गांवों से आने वाली छात्राओं के लिए बस सेवा भी कॉलेज द्वारा शुरू की गई है। अभिभावकों का छात्राओं की शिक्षा को लेकर आई साल दर साल की जागृति से यहां छात्राओं का आंकड़ा 650 तक पहुंचा।

हरकिसी ने दिया सहयोग

प्रमुखसमाजसेवी लाला प्यारेलाल, लाला खुंजाची ने बताया कि स्वामी गणेशानंद की नारी शिक्षा को लेकर सोच का नतीजा है कि यहां महिला कॉलेज का निर्माण शुरू हुआ। उस समय लोगों द्वारा अपने-अपने स्तर पर चंदा, कमरे कॉलेज निर्माण में दिए गए हैं। यहां लोगों के सहयोग से कॉलेज का निर्माण हुआ। आज यहां आस-पास गांवों की बेटियां शिक्षा ग्रहण करने रही है। मंडी के बीचों-बीच कॉलेज होने के कारण यहां आने-जाने वाली छात्राओं को किसी तरह की परेशानी भी नहीं होती है। कॉलेज सीनियर लेक्चरर किरण खुराना ने बताया कि वह कॉलेज की शुरुआत से छात्राओं को पढ़ा रही हैं। शुरुआत में महिला कॉलेज में काफी प्रयास के बाद अभिभावक छात्राओं को पढ़ने के लिए भेज रहे थे। कुछ सालों से बदली सोच के कारण अब छात्राओं के एडमिशन में इजाफा हो रहा है। इससे नारी शिक्षा को बढ़ावा मिल रहा है।

अभिभावक भेजने को तैयार

^महिलाकॉलेज द्वारा गांव में बस सेवा शुरू करने से अब अभिभावक कॉलेज में भेजने को तैयार हो रहे हैं। लिंक मार्गो पर बस सेवा नहीं होने से गांव में पढ़ाई के बाद अभिभावक नहीं भेजते हैं। समय के साथ-साथ अभिभावकों की सोच बदलने से नारी शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। -निर्मलापेगां, छात्रा बीए प्रथम वर्ष

महिला शिक्षा को मिला बढ़ावा

^महिलाकॉलेज में निरंतर छात्राओं की संख्या बढ़ने से यहां महिला शिक्षा को बढ़ावा मिल रहा है। क्षेत्र का एक मात्र महिला कॉलेज में निरंतर छात्राओं की संख्या बढ़ने से साफ है कि अभिभावक बेटियों की शिक्षा के प्रति गंभीर हो रहे हैं। पहले गांवों में बसों की सुविधा होने के कारण अभिभावक छात्राओं को नहीं भेज पा रहे थे। -रीनासंडील, बीसीए प्रथम वर्ष।

बढ़ रही संख्या अच्छा संकेत

^अभिभावकबेटियों की शिक्षा के प्रति गंभीर हो रहे हैं। यहां महिला कॉलेज में निरंतर बढ़ रही छात्राओं की संख्या से साफ है कि अब बेटों की तरह बेटियों को शिक्षित अभिभावक करना चाहते हैं। जिन गांवों में छात्राओं का कॉलेज में पढ़ने का मन है वहां बस रूट बनाकर उन्हें बस सुविधा मुहैया करवाई जा रही है। -बबीतागर्ग, प्रिंसिपल, एसडी महिला कॉलेज, उचाना।