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पत्तों को रगड़कर लगाएं पीला रतुआ का पता : नैन
बढ़तीरबी की फसल पर अब किसानों को ध्यान देने की जरूरत है। किसान अगर फसल की निगरानी रखेंगे तो फसल को रोगों से बचाया जा सकता है। फसल रोगों से बचेगी तो अच्छी पैदावार होगी।
खंड कृषि अधिकारी डॉ. जोजन सिंह ने उचाना कलां के खेतों में किसानों को गेहूं की फसल में आने वाली पीला रतुआ की बीमारी के लक्षण बचाव के बारे में जानकारी दी। किसानों ने बताया कि बीती साल जब गेहूं की फसल पकने लगी थी तब यह बीमारी आने शुरू हो गई थी। इस बीमारी से गेहूं की फसल का उत्पादन भी प्रभावित हुआ। इस साल क्षेत्र में 97 हजार एकड़ में गेहूं की फसल की बिजाई हुई है।
डॉ. नैन ने कहा कि पोषक तत्वों की वजह से भी गेहूं की फसल के पत्ते पीले होने लगते हैं। पीले पत्ते पीले रतुआ में काफी अंतर है।
पीले रतुआ से ग्रस्त गेहूं के पत्तों को अगर हाथ या सफेद कपड़े से रगड़ा जाए तो वह पीला हो जाएगा। ऐसा हो तो समझिए कि खेत में पीला रतुआ है। उन्होंने कहा कि पीला रतुआ के लक्षण दिखने पर किसान प्रोपीकोनाजॉल दवा का छिड़काव करना चाहिए। यदि किसी किसान को खेत में ऐसी बीमारी के लक्षण नजर आए तो वो कृषि कार्यालय में संपर्क करें।
अधिक ठंड होने पर पीला रतुआ फैलने की आशंका होती है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार जब तक तापमान 22 डिग्री से अधिक होगा तब तक पीला रतुआ बीमारी फैलने की आंशका कम होती है। इस मौके पर राजेश कुमार, श्याम लाल, सुरेश, बलजीत मौजूद रहे।