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जिस स्कूल में एक गेट है वहां पर जगह होने पर दूसरा गेट जरूर लगाएं : नेहरा

5 वर्ष पहले
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स्कूलवाहनमें सीट पर बैठने की क्षमता से 1.5 गुणा से अधिक बच्चों को नहीं बिठाया जा सकता। जिन शिक्षण संस्थानों के वाहनों की पार्किग व्यवस्था संस्थान के अंदर, वहीं से बच्चों को वाहनों में बिठाया उतारा जाए। वाहनों पर कार्यरत चालकों का पांच वर्ष में एक बार संबंधित विभाग से मेडिकल फिटनेस अवश्य होना चाहिए। वाहनों में सीसीटीवी कैमरे भी अवश्य लगवाएं। ऐसा नहीं होने पर संस्थान कार्रवाई के लिए तैयार रहे। उक्त शब्द पुलिस अधीक्षक डॉ. अरुण सिंह नेहरा ने कहे। एसपी लघु सचिवालय स्कूल संचालकों की मीटिंग ले रहे थे।

एसपी ने कहा कि हरियाणा एवं पंजाब हाईकोर्ट चंडीगढ़ द्वारा सीडब्बलूपी नंबर 7639 ऑफ 1995 के संबंध में जारी किया है। जिसमें शिक्षण संस्थानों द्वारा बच्चों को लाने ले जाने के लिए प्रयोग किए जाने वाले वाहनों का मोटर वाहन अधिनियम की धारा 66 के अन्तर्गत परमिट होना चाहिए। इसके साथ-साथ वाहनों का फिटनेस प्रमाण पत्र इंश्योरेंस प्रमाण पत्र होना भी अनिवार्य है। वाहनों पर लगाए जाने वाले चालकों को वाहन चलाने का पांच साल का अनुभव होना बहुत जरूरी है। चालक द्वारा तीन बार से अधिक यातायात के नियमों की उल्लंघना करने बारे चालान नहीं होना चाहिए। ही चालक के खिलाफ धारा 279, 336, 33, 338 304ए भारतीय दंड संहिता के अपराध के तहत केस हो।

चालकवर्दी में हों और नेम प्लेट लगाएं : पुलिसअधीक्षक ने बताया कि शिक्षण संस्थानों के वाहनों पर कार्यरत चालक परिचालकों को निर्धारित रूप से वर्दी पर नाम लाइसेंस नंबर की प्लेट लगाकर रखना जरूरी है। वाहन चलाते समय चालक परिचालक के पास वैध लाइसेंस होना चाहिए। सभी वाहनों के साथ बच्चों की देखभाल करने के लिए एक सहायक जरूर होना चाहिए। वाहनों के मुख्य मार्गों, सेक्टरों काॅलोनियों में रुकने के स्थान पर सूचक बोर्ड लगे होने चाहिए। वाहन चालकों एवं परिचालकों हर दो वर्ष में रिफ्रेशर कोर्स राज्य परिवहन विभाग के माध्यम से अवश्य करवाएं। शिक्षण संस्थानों द्वारा प्रयोग किए जाने वाले वाहनों का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य है।

वाहन की गति 50 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक नहीं होनी चाहिए। सभी शिक्षण संस्थानों को अपने वाहनों पर स्कूल का नाम, मार्ग समय लिखा गया बोर्ड लगा होना चाहिए। वाहनों में प्राथमिक चिकित्सा की किट भी अनिवार्य रूप से रखें। जिसको संबंधित विभाग द्वारा किसी भी समय चेक किया जा सकता है।

स्टॉफकी होनी चाहिए वेरीफिकेशन : डॉक्टरअरुण सिंह नेहरा ने कहा कि कहा कि स्कूल के स्टाफ की समय समय पर वेरीफिकेशन भी अवश्य करवाए। स्टाफ को पहचान पत्र जारी कर उसे प्रयोग करने के निर्देश भी दे और समय समय पर बच्चों के बैग भी अवश्य चेक करें। बच्चों के माता-पिता को स्कूल में बुलाकर उनकी बैठक का आयोजन करें।

उन्होंने कहा कि यदि स्कूल में मात्र एक गेट लगा हुआ है वहां पर दूसरे गेट लगाने की जगह है तो दूसरा गेट भी अवश्य लगाए ताकि बच्चे आसानी से जा सके। शिक्षण संस्थानों में शिकायत पेटी भी अवश्य रखे। 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को वाहनों पर आने की हिदायत दें। शिक्षण संस्थानों में आग जैसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आग बुझाने के यंत्र अवश्य लगे होने चाहिए।

महिला पुलिस हेल्प 1091 पर करें संपर्क

उपपुलिस अधीक्षक उषा ने उपस्थित प्रधानाचार्यों एवं प्रिंसिपलों को कहा कि वह अपने स्कूल की छात्राओं को बताए कि यदि उनके साथ स्कूल या स्कूल के बाहर कोई अप्रिय घटना होती है तो उसकी सूचना तुरंत अपने माता-पिता या स्कूल के किसी भी अध्यापक को अवश्य बताएं या फिर महिला पुलिस हेल्पलाइन 1091 पर सूचना देने बारे जागरूक करें।

यमुनानगर | शिक्षणसंस्थान के मुखिया को संबोधित करते एसपी डॉ. अरुण सिंह नेहरा अन्य प्रशासनिक अिधकारी।

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