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सत्संग ही मनुष्य को कर्म रूपी प्रकाश की ओर ले जाता है : ओबरॉय

5 वर्ष पहले
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संतनिरंकारीभवन में रविवार को महात्मा इकबाल चंद ओबरॉय की अध्यक्षता में सत्संग का आयोजन किया गया। मंच संचालन महात्मा जेके नारंग ने किया। इकबाल चंद ओबरॉय ने कहा कि जिस प्रकार एक जले हुए दीपक से हजारों दीपक जलाए जा सकते हैं, उसी प्रकार मनुष्य सत्संग में आकर अपने अंदर के ज्ञान रूपी दीपक को जला सकता है। इस ज्ञान रूपी दीपक के जलने से वह संसार को भी ज्ञानवान कर सकता है। उन्होंने कहा कि केवल सत्संग ही मनुष्य अज्ञान रूपी अंधकार से निकालकर, कर्म रूपी प्रकाश की ओर ले जाता है। इसके लिए सतगुरु की शरण जरूरी है। सतगुरु हमारे हर कदम, हर मुश्किल राह को सरल बना देता है। किसी भी विकट स्थिति में सेवा सत्संग मनुष्य की ढाल बनकर काम आते हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु को देखना ओर पाना दोनों बहुत ही जुदा परिस्थितियां है। प्रभु को जानना, पहचानना और मानना बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भगवान वह परम सत्य है, जिसे जानने के बाद सभी प्रकार के भ्रम मिट जाते हैं। किसी भी प्रकार भय नहीं रहता। स्वयं बाबा हरदेव सिंह महाराज कहते हैं कि ब्रह्म की प्राप्ति, भ्रम की समाप्ति। मात्र देखने से कोई लाभ नहीं होता, जब तक हम उस वस्तु का पा लें। हमें निरंतर उस प्रभु को पाने का प्रय| करना चाहिए। मानव को हर समय निरंकार रूप में सद्गुरु की उपस्थिति महसूस करनी चाहिए।

यमुनानगर | संतनिरंकारी भवन में मौजूद महिलाएं।

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