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पीक 6 ऑवर का रखें ध्यान, इसी दौरान हुए 69 फीसदी हादसे

7 वर्ष पहले
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इसलिए भी बढ़ा ट्रैफिक दबाव

शाम 5 से साढ़े 8

दोपहर दो से 3 तक

सुबह 8 से साढ़े 9

24मेंसे 10 घंटे हम घर से बाहर बिताते हैं, लेकिन 10 में से 6 घंटे सड़क पर चलने के लिए सुरक्षित नहीं है। सुबह 8 से साढ़े 9 बजे, दोपहर दो से 3 बजे और शाम को 5 से साढ़े 8 बजे के बीच वो वक्त है जिसमें सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। यहीं वजह है कि पुलिस विभाग इन 6 घंटों को पीक ऑवर कहता है। दिसंबर 2013 से अब तक (इन 6 घंटों में) 171 हादसे हुए। इनमें 142 लोग घायल हुए और 45 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। ये तो वे आंकड़े हैं जो थानों में दर्ज है। रोड सेफ्टी के लिए काम करने वाली संस्था ओमसेवा संस्थान के साथ मिलकर भास्कर ने एक साल में हुए हादसों ग्राफ से यह आंकड़ा निकाला है। एक साल में 250 हादसे हैं।

सबसेज्यादा चालान हेलमेट के हुए : ट्रैफिकथाना पुलिस द्वारा बिना हेलमेट वाले चालकों के सबसे ज्यादा चालान काटे जाते हैं। हर माह कटने वाले 1400 में से 700 चालान सिर्फ बिना हेलमेट वालों के होते हैं। लोग बिना हेलमेट के घर से निकलते हैं और हादसे का शिकार हो जाते हैं। बहुत से ऐसे भी हैं जो दोपहिया वाहन के साथ हेलमेट तो लेकर चलते हैं लेकिन वह उनके सिर की बजाय हाथ पर टंगा होता है। जो हादसे की बड़ी वजह है।

गाडिय़ांबड़ी लेकिन सड़कें छोटी : सड़कसुरक्षा में अहम भूमिका निभा रही ओम सेवा संस्थान के अध्यक्ष सुशील आर्य का कहना है कि आजकल बड़ी गाडिय़ों का क्रेज है। बड़ी गाड़ी पलक झपकते ही रफ्तार पकड़ लेती हैं।

पैरेंट्सकी लापरवाही से हो सकता है बड़ा हादसा : स्कूलोंमें जाने वाले 90 प्रतिशत स्टूडेंट की उम्र 18 साल से कम है। 18 साल से पहले ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बनता। इसके बावजूद स्टूडेंट स्कूलों में स्कूटी, पल्सर बुलेट तक लेकर जाते हैं। एक तो 18 से पहले बाइक चलाते हैं दूसरा तीन से चार सवारी बिठाते हैं। वर्कशाप निवासी वीरभान का कहना है कि इसमें पहली गलती तो पैरेंट्स की है कि वे छोटे बच्चों को बाइक दे रहे हैं। सड़क पर उनके साथ कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

एक्सपर्ट मानते हैं कि साइकिल का दौर खत्म होना हादसों की बड़ी वजह है। साइकिल चलाना तो जैसे शान के खिलाफ सा हो गया है। बाजार में सब्जी लानी है तब गाड़ी, दवा लानी है तब गाड़ी, स्कूल, कॉलेज जाना है तो बाइक। यानी बिना बाइक या कार के तो कहीं कदम रखते ही नहीं। इससे सड़को