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भेड़ पालते हैं बीसी, सब्सिडी मिल रही एससी को
सरकारकीएक ऐसी योजना भी है जिसका आज तक किसी ने फायदा नहीं उठाया है। सरकार उन लोगों को सब्सिडी दे रही है जो भेड़ पालन योजना के दायरे में नहीं आते। भेड़ पालन का काम पाल समाज के लोग करते हैं जोकि बैकवर्ड कास्ट (बीसी) में आते हैं, लेकिन सरकार सब्सिडी अनुसूचित जाति (एससी) को दे रही है। यही वजह है कि असली हकदार है सब्सिडी मुआवजे के लिए धक्के खा रहे हैं।
54हजार रुपए का मिलता है लोन : पशुपालनविभाग द्वारा लोगों को 54 हजार रुपए का लोन भेड़ पालन के लिए दिया जाता है। इस पर 25 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। इस राशि से लोगों को 20 भेड़ एक मिंडा खरीदना होता है। यह लोन सिर्फ भेड़ के लिए होता है बकरी पालन के लिए नहीं।
जोपालते हैं भेड़, वे आते हैं बीसी में: यमुनानगरजिले में जो लोग भेड़ पालन का काम करते हैं वे बीसी में आते हैं। लेकिन सरकार स्कीम का फायदा एससी को दे रही है। जिले में एससी का एक भी परिवार ऐसा नहीं है जो भेड़ पालता हो। वहीं बीसी के करीब 320 परिवार भेड़ पालन से जुड़े हैं। यही वजह है कि आज तक एक भी एससी परिवार स्कीम का फायदा लेने के लिए पशुपालन विभाग के दफ्तर में नहीं आया।
सभीको मिले फायदा : नर सिंह : हरियाणापाल महासभा के प्रदेशाध्यक्ष नर सिंह का कहना है कि जींद, हिसार, रोहतक में ही कुछ एससी लोग भेड़ पालन करते हैं। बाकी जगह बीसी ही भेड़ पालते हैं। यही वजह है कि जिले में एक भी भेड़ पालक ने इस स्कीम का फायदा नहीं उठाया। हम ये नहीं कहते कि इसका फायदा सिर्फ बीसी को मिले। जो भी भेड़ पालन करता है सभी को स्कीम का फायदा दिया जाना चाहिए।
कमिश्नरको पत्र लिखा है : डीडीए पशुपालविभाग के उप निदेशक डॉ. वीआर मुंजाल का कहना है कि यह सच है कि स्कीम का फायदा सिर्फ एससी को मिलता है। आज तक एक भी व्यक्ति ने इसका फायदा नहीं उठाया है। इस बारे में डीसी से बात हुई थी। मैंने और डीसी दोनों ने ही कमिश्नर को स्कीम बदलने के लिए पत्र लिखा है।
64 भेड़ मार दी थी कुत्तों ने, नहीं मिला मुआवजा
करीबछह माह पूर्व कैंप के गुरमेज पाल की 64 भेड़ों को जंगली कुत्तों ने नोच कर मार दिया था। इससे गुरमेज को लाखों का नुकसान हुआ था। भेड़ों का पोस्टमार्टम भी किया गया। मुआवजे के लिए गुरमेज ने डीसी से अपील की। इस पर फाइल को पशुपालन विभाग में भेज दिया गया। लेकिन विभाग के अधिकारियों ने यह कह कर मुआवजा देने से मना क