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कृष्ण को पता था कि दिव्य ग्रंथ की जरूरत पड़ेगी

7 वर्ष पहले
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श्रीकृष्णकृपा सेवा समिति जगाधरी द्वारा दशहरा ग्राउंड में आयोजित दिव्य गीता सत्संग में स्वामी ज्ञानानंद जी ने कहा कि 5150 वर्ष पूर्व जब भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को उसका मोह दूर करते हुए युद्ध क्षेत्र में गीता ज्ञान दिया तो उस समय भगवान जानते थे कि इस दिव्य ग्रंथ की आवश्यकता आज के युग में होगी।

तो उनके मन में ऐसा दिव्य ग्रंथ देने की चाह जागी जो आज यह ग्रंथ मानव के लिए मार्गदर्शन कर रहा है। आज का प्राणी अज्ञानता के अंधकार में डूबा है। मगर भगवत गीता बताती है कि जीवन की सच्चाई क्या है। महाराज ने कहा कि भौतिकवाद उसे कहते हैं जो शरीर के लिए स्वाद दे। शरीर के लिए स्वास्थ्य, स्वच्छता, सजलता का ध्यान रखना अच्छा है। मगर यह भूल जाना कि शरीर किसका दिया हुआ है, किसके द्वारा चल रहा है तथा किस सत्ता के निकलने पर शरीर शव की संज्ञा पा जाता है वही महाराज ने भगवान राम के बारे में बताया कि रात भर भगवान राम को राजतिलक करने अयोध्या का राजा बनाने की तैयारी चलती रही।

मगर दृश्य बदला सिंहासन भरत के लिए राम को 14 वर्ष का बनवास हुआ। इसके बाद स्वामी ज्ञानानंद जी ने श्री सनातन धर्म मंदिर में आयोजित हार्ट चेकअप शिविर का दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया।

शिविर में मैक्स सुपर स्पेशीलिटी अस्पताल मोहाली में एसोसिएट डायरेक्टर-कार्डियोलॉजी डॉ. अनुराग शर्मा ने लोगों की जांच की। मौके पर श्री कृष्ण कृपा सेवा समिति के प्रधान लाल अमरनाथ बंसल, उपप्रधान जितेंद्र गुप्ता, डॉ. लोकेश गर्ग, राजपाल, प्रदीप मित्तल, कुसुम त्यागी, राकेश त्यागी, राकेश ओबराय, नीरज कालड़ा, कोमल धवन, विक्की, राघव गौरी, एडवोकेट केवल कृष्ण, संजीव बग्गा, योगेश ढल, रमेश लांबा, गौतम छाबड़ा मौजूद रहे।