पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • एकता के लिए खतरनाक है सांप्रदायिकता: अबरोल

एकता के लिए खतरनाक है सांप्रदायिकता: अबरोल

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
जनसंघर्षसमिति के आह्वान पर \\\"सांप्रदायिकता और भारत\\\' विषय पर कन्वेंशन सीपीआई के धर्मपाल और आम आदमी पार्टी के नेता संजीव वालिया की अध्यक्षता में हुई। मंच संचालन सीपीआईएम के नेता जरनैल सिंह ने किया। मुख्य वक्ता शिक्षाविद् प्रो. बीबी अबरोल ने सांप्रदायिकता को देश की अखंडता एकता के लिए खतरनाक बताया।

उन्होंने कहा कि छह दिसंबर 1992 को जो अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराकर सांप्रदायिक सदभाव पर भारी चोट की गई। इसके लिए जहां कट्टरपंथी ताकतें जिम्मेवार हैं। साथ ही उस समय की केंद्र उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार भी जिम्मेदार है। आज तक उन घिनौनी ताकतों को कानूनन सजा नहीं दी गई। इससे कानून के राज पर प्रश्न चिह्न है।

प्रो. अबरोल ने कहा कि आज देश की बागडोर संभाले राजनेता ऐसी घिनौनी भाषा बोलकर राष्टभक्ति का ढोल पीट रहे हैं कि उनको देश के रखवाले कहते हुए सिर शर्म से झुक जाते हैं। संजीव वालिया ने कहा कि भारत एक बहुधर्मी भिन्नताओं वाला देश है।

सांप्रदायिकता के खिलाफ शहीदे आजम भगत सिंह के विचार हमारे पथ प्रदर्शक है। हमें ऐसे संगठनों तत्वों से राष्ट्रीयता का प्रमाण लेने की जरूरत नहीं जो खुद घृणित मानसिकता से ग्रस्त हैं। सीपीआई के वरिष्ठ नेता धर्मपाल चौहान ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि गंगा, यमुना, सरस्वती जीवों की जीवन रेखा है। पानी पीने के लिए ये लोगों को कर्म नहीं पूछती।

ऐसा धर्म जो लोगों को आपस में लड़ाता है वह मानव धर्म नहीं हो सकता। हमें ऐसे नकली चेहरों को पहचान कर समाज से अलग-अलग करना है। मौके पर डॉ. कर्ण सिंह, विनोद कुमार त्यागी, एडवोकेट बलबीर सिंह, फकीर चंद, हरभजन संधू, सुरेंद्र डोगरा, सुखविंद्र सिंह, अजमेर सिंह मौजूद रहे।