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महीने में एक बार पकड़े गए तब भी घाटे का सौदा नहीं माइनिंग
कोर्टअवैधखनन को लेकर चिंतित है। इसके बाद भी खनन को लेकर कोई सख्त नियम नहीं है। लचर ढीले कानून का फायदा माइनिंग माफिया बखूबी उठा रहा है। खनन पर प्रतिबंध भी माइनिंग माफिया को खूब रास रहा है। क्योंकि अब रेत और बजरी पर उनका एकाधिकार है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जिस प्राकृतिक संपदा को बचाने के लिए कोर्ट ने माइनिंग पर पाबंदी लगाई, उसका क्या होगा। क्या उसका यूं ही दोहन होता रहेगा। खनन बंद है। रेत के दाम आसमान पर हैं। लेकिन खनन विभाग अभी रेत के दाम बाबा आदम के तय कर रहा है। जिसका लाभ माइनिंग माफिया उठा रहा है। खनन का यह गणित इतना जबरदस्त है कि इसमें पकड़े भी गए तो भी लाभ। नुकसान की गुंजाइश तो कतई नहीं।
यहहै गणित खनन के खेल का: पहलेतो पकड़ना मुश्किल। यदि पकड़ा भी गया तो होगा क्या। इसके लिए जुर्माना लगाया जाएगा। यह जुर्माना 30 रुपए प्रति मीट्रिक टन है। इसके बाद सरकारी रेट, जो बेहद मामूली होता है। यानी खनन विभाग के अधिकारियों के पास यह अधिकार है कि वे ट्रॉली पर कितना जुर्माना लगाए।
मान लो दस हजार रुपए प्रति ट्रॉली जुर्माना लगा भी दिया। खुले बाजार में एक ट्रॉली रेत 12 से लेकर 13 हजार तक आराम से बिक जाता है। यानी इस सूरत में भी माइनिंग करने वाला कमाता ही है। खनन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रेत से भरा वाहन पकड़े जाने पर जुर्माना रॉयल्टी लगाकर 10 से 15 हजार रुपए माफिया को चुकाने पड़ते हैं।
जुर्मानादिया और अपराध मुक्त : अवैधमाइनिंग में क्योंकि क्रिमिनल मामला तो दर्ज हुआ नहीं। ऐसे में आरोप कैसा। जैसे ही जुर्माना दिया। यह सीधे सीधे तस्करी का मामला है। पर क्योंकि कार्रवाई इस प्रक्रिया के तहत होती ही नहीं। इसलिए जुर्माना अदा करते ही सारा अवैध माइनिंग का गुनाह माफ। मामला तब दर्ज होता है कोई भी वाहन अवैध माइनिंग के दौरान तीसरी बार पकड़ा जाए। लेकिन सच्चाई यह है कि रेत से भरे वाहन को एक बार पकड़ना भी बड़ा मुश्किल है।
इधर, ट्रैक्टर चालक पर केस दर्ज
खिजराबादके गांव आमवाला में अवैध खनन का रेत लेकर जा रहे ट्रैक्टर ट्रॉली चालक को खनन अधिकारियों ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन वह मौके से भागने में कामयाब हो गया। माइनिंग इंस्पेक्टर ओमप्रकाश शर्मा का कहना है कि टीम को सूचना मिली थी कि गांव आमवाला से अवैध खनन के रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली जा रही है। सूचना पर टीम वहां पहुंची लेकि