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डीएवी गर्ल्स कॉलेज में बड़े भाई साहब गुल्ली डंडा नाटक का मंचन

7 वर्ष पहले
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डीएवी कॉलेज में हिंदी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मौजूद स्टाफ। एवं नाटक का मंचन करते कलाकार।

नाटक में रटंत विद्या पर किया कटाक्ष, दर्शक लोटपोट हुए

भास्कर न्यूज | यमुनानगर

मैंदिनरात मेहनत करता हूं, फिर भी एक क्लास में दो साल लग जाते हैं। ये डायलॉग जब बड़े भाई साहिब कहानी के मंचन के दौरान डीएवी गर्ल्स कॉलेज के सभागार में बोला गया, तो वहां बैठे लोग हंसी से लोटपोट होते नजर आए। कॉलेज में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में मुंशी प्रेमचंद की कहानी बड़े भाई साहिब तथा गुल्ली डंडा का मंचन किया गया। जिसमें सार्थक कला मंच करनाल के कलाकारों ने जीवंत चित्रण प्रस्तुत कर खूब वाहवाही बटोरी।

बड़े भाई साहिब कहानी के मंचन में दिखाया गया कि किस तरह से शिक्षा तंत्र को रटंत विद्या बनाकर छोड़ दिया गया है। शिक्षा के स्वाभाविक पक्ष को दरकिनार करके एक मशीनीकरण युग का निर्माण व्यक्ति कर रहा है। साथ ही संदेश दिया कि पढ़ाई के साथ-साथ खेल-कूद और अन्य गतिविधियां भी व्यक्तित्व विकास के लिए उतनी ही जरूरी है, जितना कि पढ़ाई। यह कहानी दो भाइयों की है, जिसमें बड़ा भाई सिर्फ पढऩे की बातें करता है और दिन रात पढ़ता भी है। लेकिन दूसरी तरफ उसका छोटा भाई पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद और अन्य गतिविधियों में बढ़चढ़ कर भाग लेता है। हास्यास्पद स्थिति तब हो जाती है, जब बड़ा भाई बार-बार फेल होने की वजह से मुश्किल से दसवीं कक्षा ही पास कर पाता है, जबकि छोटा भाई इंजीनियर बन जाता है।

गुल्ली डंडा कहानी वर्ग चेतना पर आधारित है। जिसमें वहीं छोटा भाई इंजीनियर बन कर अपने गांव में जाता है। जहां अपने पुराने मित्रों से मिलता है। चूकिं यह अफसर हो गया है, तो इसके पुराने मित्र इसका अदब करते हैं। पुराने मित्रों में गया नाम का एक साथी भी होता है। जो बचपन में बहुत अच्छा गुल्ली डंडा खेलता था। इंजीनियर, गया को गुल्ली डंडा खेलने के लिए मना लेता है। परंतु गया उसके साथ मन लगाकर नहीं खेलता है। क्योंकि वह उसका मान रख रहा था। अफसर उसके साथ खेल में बेइमानी करता है, परंतु वह कुछ भी नहीं कहता। जबकि अगले दिन वही गया गांव के खिलाडिय़ों के साथ निपुणता के साथ गुल्ली डंडा खेलता है और विजयी होता है। यह कहानी हमें संदेश देती है कि किस प्रकार हमारा वर्ग या हमारा पद हमें अपने साथियों से दूर कर देता है। मंचन के दौरान छोटे भाई तथा अफसर की भूमिका विनोद क