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ज्ञानानंद जी महाराज जब आंखों के कैंप में श्रधालुओं से

7 वर्ष पहले
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ज्ञानानंद जी महाराज जब आंखों के कैंप में श्रधालुओं से मिलने पहुंचे तो हर कोई श्रद्धा से नतमस्तक हो गया।

श्री मद् भागवत गीता दिव्य ग्रंथ है : ज्ञानानंद

भास्कर न्यूज | यमुनानगर

स्वामीज्ञानानंदमहाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत गीता दिव्य ग्रंथ है, जिसकी रचना संपूर्ण मानव कल्याण के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने की।

वे श्रीकृष्ण कृपा सेवा समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कहे। इससे पूर्व उन्होंने सनातन धर्म मंदिर मॉडल टाउन में आंखों के नि:शुल्क जांच शिविर का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यमुना और गाय के लिए विशेष काम होना चाहिए। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से समय मांगा है।

जल्द ही इस दिशा में काम होने की उम्मीद है। ज्ञानानंद ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा जीवन यात्रा को बहुत सहज, निष्कपट मंगलमय बना सकती है। इसका प्रत्येक श्लोक प्रेरणा देने वाला है। जीवन एक यात्रा है, इसके दो रूप बाहरी यानि शरीर की यात्रा, जो अपने गण तत्व की ओर स्वाभाविक चल रही है। जीव पैदा होता है, बाल काल में आता है, यौवन से प्रौढ़ अवस्था फिर बुढ़ापा यात्रा चलती रहती है। इसी प्रकार दूसरी यात्रा जीव के अंदर की यात्रा है, जिसे वह समझ ही नहीं पाता, जीते जी सांस्सारिक उलझन में फंसकर दुखी रहता है। अर्जुन भगवान कृष्ण के अनन्य भगत बने रहे, यानि अर्जुन का भाव हमेशा भगवान के लिए बना रहा। इसी प्रकार भगवान कृष्ण का प्यार अर्जुन के प्रति स्वाभाविक रहा। घटोत्कच के मारे जाने पर जब पांचों पांडव निराशा में बैठे थे।

तो भगवान कृष्ण ने अर्जुन को आलिंगन में ले लिया तथा कहा कि अब अर्जुन को कोई मार नहीं सकता। क्योंकि कर्ण के पास जो शक्ति थी, उसे उसने इस्तेमाल कर लिया।

यदि कर्ण उसे सुरक्षित रखता, तो अर्जुन के साथ कुछ भी हो सकता था। यहां पर भगवान का प्यार अर्जुन के प्रति प्रकट होता है। मौके पर अमरनाथ बंसल, राज सलूजा, देवकी नंदन, दीप राज चुघ, बंदी, नीरज कालड़ा, योगेश ढल, विजय मदान, बंटी एडवोकेट केवल कृष्ण सैनी उपस्थित थे।