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दुनिया के सुख में खोकर रह गया इंसान: सेठी
यमुनानगर | संतनिरंकारी भवन में हुए सत्संग में मौजूद महिलाएं।
भास्कर न्यूज | यमुनानगर
84लाखयोनियां भुगतने के बाद मानव को हीरे जैसा यह तन मिला है। इस जीवन में आकर भी मानव भगवान की जानकारी कर सकता है, लेकिन मानव इस तन को कौड़ियों के भाव गवां रहा है।
मानव शरीर में रहकर ही इस आत्मा को पूर्ण परमात्मा के दर्शन हो सकते हैं, लेकिन मानव शरीर मिलने के बाद इंसान दुनियावी सुखों में खो गया है। आज निरंकारी बाबा इंसान को सही मार्ग दिखाकर जन्म मरण के चक्कर से निजात दिला रहे है। यह शब्द रविवार को संत निरंकारी भवन में आयोजित साप्ताहिक सत्संग में दिल्ली से आए महात्मा सुनील सेठी ने कहे।
उन्होंने कहा कि मानव शरीर के सुखों में आत्मा के कल्याण को भूल बैठा है। आत्मा के कल्याण के लिए पूर्ण सतगुरु की पहचान करनी है। पूर्ण सतगुरु इंसान को परमात्मा के दर्शन करवाकर मोक्ष का मार्ग दिखा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एक जलता हुआ दिया सैकड़ों बुझे हुए दिए को जला कर प्रकाश पैदा करता है। उसी प्रकार सतगुरु इंसान को सहीं मार्ग दिखा कर बुराइयों को समाप्त करता है।
आज का इंसान परमात्मा को इंसान के द्वारा ही बनाई गई मूर्तियों में तलाश रहा है। उनकी पूजा कर रहा है। लेकिन जो मानव रूपी मूर्ति परमात्मा ने बनाई है। उसके साथ नफरत भरा व्यवहार करता है।
लेकिन संत हमेशा मानव को मानव से प्रेमभाव, मिल वर्तन और भाईचारे के साथ रहने का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि सभी धार्मिक ग्रंथों, शास्त्रों, पीर पैगंबरों का संदेश है कि इंसान के जीवन का मुख्य लक्ष्य प्रभु प्राप्ति है और यह तब तक संभव नहीं जब तक इंसान और भगवान के बीच घृणास्पद अभिमान की दीवार खड़ी हुई है।
सतगुरु पांच प्रण द्वारा अभिमान की दीवार को तोड़कर इंसान और भगवान को आपस में मिलकर सहजता, सहनशीलता, विनम्रता और आत्मिक सुख प्रदान करता है। मंच संचालन महात्मा संदीप ओबरॉय ने किया। सत्संग के दौरान अनेक संतों ने अपने भजनों कविताओं और विचारों से संगत को निहाल किया।