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मानव जीवन को कौड़ियों के भाव मत गवाओ : अमरीक सिंह

7 वर्ष पहले
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भक्तिकरनेवालों को ही जीवन में भक्ति का लाभ मिलता है। जैसे फूल में खुशबू का होना जरूरी है, उसी प्रकार मानव मन में प्रेम का भाव होना बहुत जरूरी है। प्रेमभाव के बिना जीवन में निखार नहीं सकता। यह विचार संत निरंकारी मंडल की सेंट्रल प्लानिंग एडवाइजर बोर्ड के संयोजक महात्मा अमरीक सिंह ने कहे। वे रविवार को संत निरंकारी भवन पर आयोजित सत्संग में प्रवचन कर रहे थे।

उन्होंने फरमाया कि सतगुरु की कृपा से संतों के जीवन की शुरुआत होती है। महापुरुष इंसान को सचेत करते हैं कि मानव जन्म को कोड़ियों के भाव मत गवाएं। जहर का पान मत करो, अमृत पान कर अमरत्व प्राप्त कर लो। यह प्रभु प्रेम का स्वरूप है। प्यार को रोम-रोम में बसा लो। घरों में प्रेम रहेगा तो घर, घर रहेगा। अन्यथा उसे चारदीवारी ही कहा जाएगा। सतगुरु के आदेशानुसार संत संसार को जाग्रति प्रदान करने का प्रयास हमेशा से करते आए हैं। भक्त प्रयास करते हैं कि प्यार की धारा निरंतर बहती रहे। प्रेम के आभूषण से जीवन सुशोभित होता रहे। इंसान को जन्म मिला है तो संतों महापुरुषों के वचन मानकर अपने आप की जानकारी हासिल करना जरूरी है। सत्संग के दौरान अनेक वक्ताओं ने गीत, कविता और अपने विचारों के माध्यम मानवता के लिए प्रेरित किया। मंच संचालन महात्मा जेके नारंग ने किया।

संत निरंकारी भवन में आयोजित सत्संग में उपस्थित संगत।