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तिगरा में पुलिस के सामने पथराव, अफसर देखते रहे
एक हजार वोट वाले गांव में शांति नहीं बना पाया प्रशासन
सदरथाना के गांव तिगरा में स्टेडियम निर्माण को चल रहे विवाद ने बुधवार को खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। पुलिस के सामने दोनों पक्षों में घंटों पथराव होता रहा, जिसमें 30 से ज्यादा लोग घायल हो गए। 10 से ज्यादा लोगों का उपचार ट्रामा सेंटर में चल रहा है। वहीं एक पक्ष ने स्वास्थ्य विभाग पर पक्षपात करने का आरोप लगाया है। स्थिति पर काबू पाने के लिए गांव में एसपी शशांक आनंद सहित अन्य प्रशासनिक अमला गांव में मौजूद है। रात करीब 10 बजे प्रशासन और ग्रामीणों में शांति को लेकर बातचीत चल रही थी, इसी बीच गोली चलने की आवाज सुनाई, जिसके बाद फिर से लोगों में अफरा-तफरी मच गई।
दरअसल, छह एकड़ पंचायती काश्त जमीन पर स्टेडियम का निर्माण होना है, जिसके लिए सरकार की ओर से 37 लाख रुपए की ग्रांट भी आई हुई है। गांव में सवर्ण दलित वर्ग के लोग रहते हैं। सवर्ण लोग स्टेडियम बनाने के पक्ष में हैं, वहीं दलित वर्ग के लोग इस जमीन पर सौ सौ गज के प्लाट काटने की मांग कर रहे हैं। इसी कारण गांव में काफी समय से विवाद चल रहा है। वहां पर स्टेडियम निर्माण के लिए मौके पर ईंटें अन्य सामान आया हुआ है। विवाद के चलते निर्माण काम बीच में रुक गया। दो माह से वहां पर पुलिस बल तैनात है।
हमलाकिया है हमारे ऊपर : सवर्णपक्ष के रणदीप, सूरज कुमार, अमित कुमार नवीन कुमार ने बताया कि गुरुवार को वह बाइक से यमुनानगर की तरफ से गांव में लौट रहे थे। गांव के निकट दलित समुदाय के लोगों ने उनको रोक लिया। इससे पहले कुछ समझ पाते, आरोपियों ने हमला कर दिया। जिससे वे लोग घायल हो गए। सवर्ण पक्ष की मंजू का कहना है कि स्कूल बस से अपनी बेटी को लेने आई थी। हमलावरों ने उस पर भी हमला कर दिया। आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग दलित पक्ष के दबाव में है। जिस कारण उनका उपचार और मेडिकल नहीं किया जा रहा है। वहीं ऑन ड्यूटी डॉक्टर्स का कहना है कि सभी आरोप निराधार हैं।
सुबह विवाद होने पर शाम के वक्त करीब साढ़े छह बजे गांव के लोग आमने-सामने गए। एक दूसरे पर पथराव डंडे चला रहे थे। पुलिस के सामने लोग हथियार लेकर एक दूसरे पर हमला कर रहे थे। इस दौरान प्रशासन पुलिस पूरी तरह से लाचार नजर आई। दोनों तरफ से हमला चल रहा था और पुलिस मूक दर्शक बनी रही। हर पल हालत बिगड़ते ही चले गए।
दूसरे गांव के लोग भी गए
झगड़ेमें दो