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100% अशक्तता के कारण आधा पेपर ही दे पाती थी अब प्रिंसिपल बनकर बच्चियों का संवार रही भविष्य
औरंगाबादकी35 वर्षीय सुदेश कुमारी। पोलियो ग्रस्त। 100 प्रतिशत अशक्त। फिर भी स्कूल गई। 12वीं की। बीए और बीएड की। अब एमए इंग्लिश कर रही हैं। जिस स्कूल में 200 रुपए प्रतिमाह वेतन पर टीचर बनी अब वहीं पर प्रिंसिपल भी हैं। 100 बच्चे पढ़ रहे हैं और छह लड़कियों को रोजगार दिया हुआ है। सुदेश कुमारी पर उनके परिजन ही नहीं पूरा गांव गर्व करता है।
लंबे ट्रीटमेंट के बाद सुदेश कुमारी का शरीर भले ही काम करने लगा था, लेकिन पूरी तरह से नहीं। ठंड में आज भी उसके हाथ ठीक से नहीं चल पाते। सुदेश कुमारी ने बताया कि उसे एग्जाम में बहुत दिक्कत होती थी। क्योंकि वह लगातार लिख नहीं सकती। कुछ देर लिखने के बाद उन्हें थोड़ा आराम करना पड़ता है। इसलिए वह कभी एग्जाम में टॉप नहीं कर पाई। बीच-बीच में आराम करने की वजह से वह 50 से 60 प्रतिशत पेपर ही कर पाती थी। उनका कहना है कि उन्होंने कभी अतिरिक्त समय भी नहीं मांगा। क्योंकि वह अपनी कमजोरी के बलबूते नहीं बल्कि हौसले के बलबूते पर आगे बढ़ना चाहती थी।
अभीसपना पूरा नहीं हुआ : प्रिंसिपलबनने के बाद भी सुदेश कुमारी का संघर्ष जारी है। वे कहती हैं कि उनका सपना अभी पूरा नहीं हुआ। वे अभी पांचवीं तक का स्कूल चला रही है इस स्कूल को वे 12वीं तक करना चाहती है। अगर 12वीं तक का स्कूल हो जाएगा तो लड़कियों को एजुकेशन लेने में दिक्कत नहीं होगी। क्योंकि गांव में आज भी लड़कियों को शहर अन्य गांव में स्कूल कॉलेज में जाने के लिए परिजनों की इजाजत लेनी पड़ती है। जब उन्हें घर के पास ही शिक्षा मिलेगी तो गांव की हर लड़की शिक्षित होगी।
पूरे शरीर ने कर दिया था काम करना बंद
सुदेशने बताया कि वह एक साल की थी तो उसे बुखार आया और उसके पूरे शरीर ने काम करना बंद कर दिया। डॉक्टर ने बताया कि पोलियो वायरस के कारण ऐसा हुआ। उसका पूरा शरीर काम करना बंद कर चुका था। ट्रीटमेंट चलता रहा तो पांच साल की उम्र में जाकर टांगों को छोड़ अन्य शरीर में एक्टिविटी होनी शुरू हो गई थी। शरीर काम करने लगा तो वह गांव के स्कूल में वह जाने लगी। उसका भाई अशोक बहन उसे अपने साथ स्कूल लेकर जाते थे। इस तरह उसने 12वीं कर ली। वह आगे भी पढ़ना चाहती थी। परिजनों का साथ मिलने से उसका हौसला बढ़ा और उसने प्राइवेट बीए के फार्म भरे। बीए करने के बाद दामला बीएड कॉलेज से रेगुलर बीएड की। एनटीटी की और अब एमए कर रही हैं।
सुदेश कुमारी।