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योजनाएं बनाने वालों में संवेदना होना जरूरी
वे इस्लामिक कंट्री में रहते हैं, मगर उनके यहां महिलाओं को दबाया नहीं जाता
>शिक्षा के विकास आधुनिकीकरण पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी
भास्करन्यूज|यमुनानगर
शिक्षा केक्षेत्र में खामी एक दो देश में ही नहीं है, बल्कि संपूर्ण दक्षिण पूर्व एशिया (35 से ज्यादा देश आते हैं) तक है। जब शिक्षा में गुणवत्ता नहीं आएगी, तब तक वह देश में तरक्की नहीं हो सकती। गुणवत्ता और खामी को दूर करने के लिए विदेश से आए डेलीगेट्स ने एक मंच पर अपने विचार सांझा किए। मौका था डीएवी गर्ल्स कॉलेज में सोशल साइसिज विभाग एवं वुमेन स्टडीज सेंटर द्वारा डेवलेपमेंट एंड मॉडर्नाइजेशन इन्क्लूजन एंड एक्सक्लुज विषय पर इंटरनेशनल सेमिनार का। इसमें केयूके के डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रोफेसर राघवेेंद्र तंवर मुख्यातिथि अध्यक्षता प्रिंसिपल सुषमा आर्य ने की। इसमें देश विदेश के 100 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
इंडोनेशिया से आई श्रीनूरयंती ने कहा कि विकास तथा आधुनिकीकरण से विशेष रूप से युवा पीढ़ी बहुत ज्यादा प्रभावित हुई है। क्योंकि उन्हें उच्च शिक्षा, वित्तीय सहायता और अपनी कुशलताओं का काफी लाभ है। परंतु देखते में आया है कि यह स्थिति सब जगह समान नहीं है। बहुत सारे देशों में एक विरोधाभास की स्थिति है।
ढाका विश्वविद्यालय से आए प्रोफेसर बरकत-ए-खुदा ने कहा कि प्राय: अर्थशास्त्री विकास को आर्थिक वृद्धि के साथ जोड़ते हैं, परंतु सच यह है कि इसे सामाजिक और मानव विकास के साथ भी जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने अपने देश में हुए विकास संबंधी कुछ आंकड़ों को भी प्रस्तुत किया। फिर भी उनका कहना है कि पूर्ण विकास केवल एक कल्पना कहा जा सकता है। क्योंकि देश की जनसंख्या का बहुत बड़ा भाग अभी भी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहा है। इसलिए ऐसी नीतियां बनाई जानी चाहिए, जो उत्पादकता तथा लोगों की आय के ग्राफ को ऊंचा उठाए। फिलिपींस से आए प्रोफेसर हर्बट बी रोजाना ने अपने देश की वस्तुस्थिति की समीक्षा करते हुए यह बताया कि मानव विकास हुआ तो है, परंतु उसके रास्ते में अभी भी अनेक प्रकार की कठिनाइयां हैं। अमेरिका से स्वतंत्रता मिलने के पश्चात से देश में काफी द्वंद्व की स्थिति रही है। अनेक प्रकार के असंतुलन देखते को मिले हैं। लेकिन धीरे-धीरे स्थिति में सुधार रहा है तथा सैन्य शासन का प्रभाव भी कम होता जा रहा है।
चीन से आई यूई जॉमिन ने कहा कि अब चीन का समाज एक सत्तावादी के स्थान पर व्यक्तिवादी हो रहा है। इसमें व्यक्ति के हितों, सुरक्षा सामाजिक भलाई की नीतियां बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इस प्रकार जीवन के मूल्यों में एक आधुनिकीकरण आता दिखाई पड़ रहा है।
प्रोफेसर राघवेंद्र तंवर ने कहा कि साधारण जन के विकास के बिना देश का संपूर्ण विकास संभव नहीं है। उन्होंने आधुनिकीकरण को संवेदनशीलता से जोड़ा और कहा कि देश के विकास के लिए योजनाएं बनाने वालों में संवेदना होना बेहद जरूरी है। उन्होंने गांधी जी के पत्रों के अंश प्रस्तुत करते हुए कहा कि जब तक देश का लिंगानुपात सही नहीं होगा, तब तक देश विकास की डगर पर अग्रसर नहीं हो पाएगा।
गुवहाटी से आए प्रोफेसर अतुल शर्मा ने बतौर मुख्य वक्ता के रूप में भारत और विश्व की तुलना करते हुए कहा कि विश्व के मुकाबले भारत युवा शक्ति के सहारे अधिक विकास कर सकता है। युवा पीढ़ी के लंबे समय तक प्रगति के कार्यों से जुड़कर देश के विकास में अपना अमूल्य योगदान दे सकती है। उच्च शिक्षा संपूर्ण विकास के लिए आवश्यक है।
केरल विश्वविद्यालय के खेल विभाग के पूर्व डीन प्रोफेसर एमएल कमलेश ने कहा कि आधुनिक युग में मानव जीवन पर विज्ञान एवं तकनीकी प्रभाव के साथ-साथ खेलों का भी प्रभाव बढ़ रहा है।
काम ज्यादा वेतन कम मिलता है
उन्होंनेकहा कि ग्रामीण क्षेत्र पिछड़ा हुआ है। वहां के लोग कृषि पर निर्भर हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य रोजगार को बढ़ाने की जरूरत है। अब गांव के लोग शहर की ओर रुख कर रहे हैं। उनका यह भी कहना अब भी लोगों को अच्छी नौकरी की कमी, काम के हिसाब से पैसे नहीं मिलते। छुट्टियों में दिक्कत आती है।
यमुनानगर| ढाका यूनिवर्सिटी से आए प्रोफेसर बरकत-ए-खुदा।
यमुनानगर | डीएवी गल्र्स कॉलेज में सोशल साइसिज़ विभाग एवं वुमेन स्टडीज सेंटर द्वारा डेवलेपमेंट एंड मॉडर्नाइजेशन: इंक्लुजन एंड एक्सक्लुज विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में गेस्ट एवं स्टाफ।