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पेंशन के लिए पात्र तो बने लेकिन पेंशन नहीं मिली
पांच माहसे कभी पार्षद तो कभी अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अभी तक पेंशन नहीं मिली है। कोई संतोषजनक जवाब भी तो नहीं देता। हम तो पहले से ही लाचार हैं, लेकिन इस सिस्टम ने हमारी लाचारी को और भी बढ़ा दिया है। समझ नहीं रहा है कि सरकार की योजनाओं में ही खोट है या फिर अधिकारी काम करके राजी नहीं है। यह दर्द उन लोगों का है जोकि पांच माह पहले बुढ़ापा, विकलांग और विधवा पेंशन के पात्र बने थे, लेकिन उन्हें पेंशन नहीं मिली। इनका कहना है कि पहले तो पेंशन बनवाने के लिए ही उन्हें धक्के खाने पड़े और अब पेंशन बन गई है, तो पैसे लेने के लिए भटकना पड़ रहा है। इससे अच्छा तो सरकार हम पेंशन पात्र बनाती ही नहीं।
तीनमाह हो गए अधिकारियों के चक्कर लगाते हुए : फर्कपुरनिवासी कादिर खान ने बताया कि वह विकलांग है। पांच माह पहले उसने पेंशन का फार्म भरा था। उसका रिकॉर्ड में नाम भी है। तीन माह हो गए है, लेकिन अभी तक उसे पेंशन नहीं मिली है।
विकलांग होने के बाद भी वह अधिकारियों के कई चक्कर काट चुका है, लेकिन उसे पेंशन नहीं मिली। जब भी पेंशन आती है उस लिस्ट में उसका नाम होता है, लेकिन पेंशन बांटने वाला पेंशन आने से मना कर देता है। उधर, विकलांग बलदेव सिंह का कहना है कि उसने अगस्त में पेंशन बनवाई थी। दो माह बाद ही लिस्ट में उसका नाम गया था, लेकिन उसे एक बार भी पेंशन नहीं मिली है।
हमारीलिस्ट में नाम है, लेकिन पैसा आता नहीं : वार्डनंबर-18 के पार्षद कर्मबीर सिंह का कहना है कि उसके वार्ड में ऐसे 40 लोग हैं जिनका नाम तो हर बार लिस्ट में आता है, लेकिन उन्हें पैसा नहीं मिलता। इस बारे में उन्हें खुद अपने स्तर पर अधिकारियों से बात की, लेकिन अधिकारी उन्हें भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं देते। लोग उसके घर के चक्कर लगाते रहते हैं, अब उन्हें क्या जवाब दें। उनका कहना है कि जिन लोगों का नाम लिस्ट में है उन्हें पेंशन मिलनी चाहिए।
इनकेपास नहीं था कोई जवाब : इसबारे में जब जिला समाज कल्याण अधिकारी अमित शर्मा से बात की गई तो उनके पास भी कोई जवाब नहीं था। उनका कहना था कि जिनका लिस्ट में नाम है उन्हें पेंशन दी जा रही है, लेकिन जब उन्हें पेंशन मिलने वालों के नाम बताए गए तो वे नए-नए बहाने तलाशते रहे। उनका कहना था कि इसे चेक कराया जाएगा।
थक चुके हैं पूछते-पूछते की कब मिलेंगे पैसे
वार्ड-18निवासी लाल चंद, बलविंद्र सिंह, सतीश कुमार, कमलजीत, हरजिंद्र सिंह, आत्माराम और लाजो देवी का कहना है कि यह पूछते-पूछते वे थक चुके हैं कि उनकी पेंशन कब जाएगी। पहले तो अधिकारियों ने पेंशन लगाने में ही कई माह निकाल दिए। पेंशन पात्र बनने के लिए उन्हें कई बार अधिकारियों के चक्कर लगाए, अब पेंशन लेने के लिए एड़ियां रगड़नी पड़ रही हैं। समझ नहीं रहा है कि इस बारे में किस को शिकायत करें और किससे गुहार लगाएं। उनका कहना है उन्हें तो ऐसा लगता है कि उनके पेंशन को अधिकारी डकार रहे हैं।