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इंडियन विलेज इज़ लुक लाइक टाउन सिटी : डॉ. यूई
मुझेनहींलगा ये गांव हैं। हमारे गांव ऐसे नहीं है। वहां पर गांव में 30 से 40 लोगों की ही आबादी होती है। इंडियन विलेज इज लुक लाइक चाइनीज टाउन सिटी। भारत और चीन के कल्चर और जनसंख्या में बेहद समानताएं हैं। यह कहना है कि चीन के सुचान एकेडमी ऑफ सोशल साइंस से आई डॉ. यूई जाहुमिन का, जो रीजनल कॉरपोरेशन, एग्रीकल्चर एंड रूलर डवलपमेंट एंड इंटरनेशनल इश्यू पर शोध कर रही हैं।
डीएवी गर्ल्स कॉलेज में सोशल साइसिज विभाग एवं वुमेन स्टडीज सेंटर द्वारा डिवेलपमेंट एंड मॉडर्नाइजेशन इन्क्लूजन एंड एक्स क्लूज विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के बाद डॉक्टर डेलीगेट के साथ इंडियन गांव की हालत देखने पहुंचे।
डॉ. यूई जाहमिन उनके साथी शनिवार रात को यमुनानगर के बुड़िया गांव में जाकर पंजाबी संस्कृति से रूबरू हुईं। जब वह गांव में पहुंची, तो उस समय डिनर का समय था। अतिथि देवो भव की तर्ज पर गांव के लोगों ने उन्हें बेहद सम्मान दिया। उन्हें एक बार भी एहसास नहीं हुआ कि वह भारत के किसी गांव में हैं। गांव के लोग उनकी बात समझ रहे थे। गांव में उन्होंने पंजाबी व्यंजनों का स्वाद चखकर स्वयं को अभीभूत महसूस किया। तब उन्होंने कहा कि भारत के गांव तो हमारे शहर की तरह लगते हैं।
चीनमें कंपल्सरी नहीं फिर भी सभी महिलाएं नौकरी करती है : उनकाकहना है कि चीन में अगर महिलाएं घर देरी से आए तो कोई उनसे वजह नहीं पूछता कि आप देरी से क्यों आए। इसकी एक बड़ी वजह है, यहां पर सभी महिलाएं शिक्षित हैं और नौकरी करती हैं। हालांकि चीन में महिलाओं के लिए नौकरी करना कंपल्सरी नहीं है, लेकिन यह उनकी आदत में गया है। चीन में कानूनी अधिकार महिलाओं और पुरुषों के समान है। उसके बाद भी वहां पर पुरुषों से महिलाएं आगे हैं।
चीन में तलाक का रेशो जीरो के बराबर
डॉ.जाहमिन का कहना है कि चीन की महिलाएं स्वयं को बेहद सुरक्षित महसूस करती हैं। इसका मुख्य कारण एजुकेशन और फ्रीडम है। चीन की महिलाएं रात के समय भी कहीं पर जा सकती है। जबकि भारत में ऐसा नहीं है। अब तक सुना था, अब यहां आकर पता भी चल गया। चीन में हर महिला अपने अधिकार जानती है। यही वजह है कि चीन में तलाक का रेशो नहीं के बराबर है। उन्होंने उदाहरण दिया कि चीन में महिलाएं नौकरी पेशे में ही नहीं है, बल्कि कृषि उद्योग के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हंै। इंडिया में इसकी जरूरत है।