पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • सरकार से सिफारिश, हर जिले में हो प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी

सरकार से सिफारिश, हर जिले में हो प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मेंबर ऑफ सेक्रेटरी का सुझाव

भास्करन्यूज | यमुनानगर

उद्योगपतियोंकोछोटे-छोटे काम के लिए लंबी दौड़ लगानी पड़े। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संबंधित सभी काम उनके जिला स्तर पर ही निपट जाए। पर्यावरण को भी साफ रखने के लिए बेहतर काम हो सके। जो रूल रेगुलेशन हैं उनका सही से पालन हो।

इसी सोच को ध्यान में रखकर अब हर जिले में प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी नियुक्ति करने की सिफारिश सरकार को की जाएगी। स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मेंबर ऑफ सेक्रेटरी अजय कादियान यह सिफारिश सरकार को करेंगे। कादियान का कहना है कि हर जिले में अधिकारी होगा तो समाज को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए बेहतर काम हो सकता है। बोर्ड की मैन पावर बढ़ेगी तो पर्यावरण को साफ सुथरा रखने के लिए ज्यादा काम किया जा सकेगा।

21जिले 12 रीजनल आफिस : प्रदेशमें 21 जिले हैं। जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास 12 रीजनल आफिस हैं। इसमें चार आफिस तो गुड़गांव और फरीदाबाद में ही है। क्योंकि वहां पर इंडस्ट्री एक्टिविटी ज्यादा हैं। इसके बाद 19 जिले बचते हैं जिनके लिए सिर्फ 8 रीजनल आफिस ही हैं। प्रदेश के यमुनानगर, बहादुरगढ़, धारूहेड़ा, पंचकूला, पानीपत, हिसार, सोनीपत, जींद में रीजनल आफिस है।

अच्छाप्रयास है : व्यापारीगुरदेव सिंह, सुरेंद्र गर्ग और जितेंद्र सिंह का कहना है कि हर जिले में अधिकारी होगा तो इससे फायदा तो होगा ही। अभी एक-एक अधिकारी पर दो से तीन जिले हैं। अगर उन्हें कोई काम पड़ता है तो आफिस में अधिकारी नहीं मिलता। आफिस में तैनात कर्मचारियों से पूछते हैं तो जवाब आता है कि साहब के पास दूसरे जिले का कार्यभार भी वे वहां पर गए हुए हैं। अगर अधिकारी आफिस में मिले तो लोगों को छोटे-छोटे काम के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

अफसरों को यह दिक्कत

विभागके अधिकारियों का कहना है कि बोर्ड में पहले से ही स्टाफ की कमी है। एक-एक रीजनल आफिसर को दो से तीन जिलों का चार्ज संभालना पड़ता है। आफिसर को दो से तीन दिन एक जिला में तो दो से तीन दिन दूसरे जिले में लगाने पड़ते हैं। हर जिले में रीजनल आफिसर होगा तो वे भी एक ही जगह पर बैठकर अच्छे से काम कर पाएंगे।

हर जिले में रीजनल आफिस खुलने से व्यापारियों तो फायदा होगा ही साथ ही पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों पर भी लगाम लगाई जा सकेगी। अगर किसी भी व्यक्ति को कोई फैक्टरी लगानी होती है तो इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से परमिशन लेनी पड़ती है। इसके साथ ही कई तरह नियमों को पूरा करने के लिए पासिंग की जरूरत पड़ती है। जिन जिलों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का रीजनल आफिसर नहीं बैठता। उन्हें हेड आफिस या फिर अन्य जिलों में अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ते हैं। लेकिन हर जिले में अधिकारी बैठने से उनका समय और धन दोनों बचेगे। करनाल का चार्ज यमुनानगर के रीजनल आफिस के पास है। अगर वहां से कोई भी व्यक्ति नियम तोड़ने वालों की शिकायत देता है तो अधिकारी समय पर नहीं पहुंच पाता और वह बड़ी ही आसानी से बच जाता है।