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पौधों से मिली ऊर्जा को मरीजों के बीच बांटते हैं डॉ. गुप्ता
अनोखा शौक : बोंजाई तकनीक से पेड़ को बदल देते हैं पौधे में
यमुनानगर. पेड़को छोटे पौधों में तब्दील करने की माहरत रखते है डॉ. अरुण गुप्ता। बोंजाई सोसाइटी ऑफ इंडिया के मेंबर मॉडल टाउन निवासी डॉ. अरुण गुप्ता (चाइल्ड स्पेस्लिस्ट) ३५ साल से प्रेक्टिस कर रहे हैं। डाॅ. गुप्ता का ४० साल से एक शौक है। बोंजाई यानि चाइनीज आर्ट से वे पेड़ को छोटे पौधों में तब्दील कर देते हैं। २००० गज की कोठी में ४००० हजार से अधिक पौधे हैं। यहां पर ७० साल से अधिक आयु के पौधे एक फीट के गमले में हैं। इनकी लंबाई भले ही छोटी हो पर शेप पौधे की तरह ही होती है। हर रोज नई शेप होती है। डॉ. गुप्ता के मुताबिक ये उनसे बाते भी करते हैं। वे हर सुबह अढ़ाई घंटे यहीं लगाते हैं। इस पुनीत कार्य में उनकी माता उषा रानी प|ी दीपिका भी सहयोग करती हैं। प्रेरणा स्त्रोत उनके पिता स्वर्गीय मदन लाल हैं। जो पेशे से किसान थे। ऐसा करने से उन्हें हर रोज ताजगी मिलती है और वो मरीजों की बेहतरी में काम आती है। खास बात ये है ये प्लांट मोल नहीं मिलते बल्कि बनाने पड़ते हैं। मेहनत इतनी है कि १० प्लांट में से ही कामयाब होता है। उनके आंगन में बरगद, पिलखन, पीपल, कैरिना, संबाबुल, गूगल के प्लांट है। इसके अलावा कैक्टस पक्षी भी हैं।