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जातपात से ऊपर उठकर इंसानियत अपनाएं : ओबराय
निरंकारी भवन में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
भास्करन्यूज | यमुनानगर
संतनिरंकारीभवन में रविवार को आयोजित निरंकारी सत्संग में महात्मा इकबाल चंद ओबराय ने कहा कि आज इंसान जात-पात के फेर में उलझता जा रहा है, जो समाज के विकास के लिए नुकसानदायक है। जात-पात के चक्कर की वजह से भाइचारा टूट रहा है और इंसान, इंसान से दूर होता जा रहा है, इसलिए लोगों को जात-पात से ऊपर उठकर केवल इंसानियत की ही बात करनी चाहिए। सत्संग के दौरान अनेक श्रद्धालुओं ने भजनों, कविताओं और अपने विचारों से गुरु की महिमा का बखान किया।
ओबराय ने प्रवचनों में कहा कि आज हम संसार की दुर्दशा देख रहे हैं किस तरह से धरती पर पाप बढ़ता जा रहा है। हैवानियत की अनेक घटनाएं देखने को मिल रही है। आज हमें दुष्कर्म, कन्या भ्रूण हत्या दहेज हत्या जैसी घटनाएं सुनने को मिलती हैं, तो बहुत ही दुख होता है। इसी तरह इंसान परमात्मा को भूलकर मोह माया के चक्कर में उलझ कर रह गया है। संत महात्मा हमेशा ही इंसान को प्यार, नम्रता सहनशीलता का पाठ पढ़ाते रहे हैं और सब के भले की बात करते रहे हैं। संत लोगों ने हमेशा दुनिया को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया है। इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। संतों महा पुरुषों ने इंसान को हमेशा इंसानियत का पाठ पढ़ाया है और हमेशा उन्हें एक अच्छा इंसान बनाने का प्रयास किया है, लेकिन आज इंसान इंसानियत का दामन छोड़कर हैवानियत को अपना रहा है। इसकी वजह से समाज में कई तरह के विकार गए हैं, जिनसे बचने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि संत जनभक्त जन मानवमात्र की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। महापुरुष जाति, धर्म, रंग नस्ल, के भेदभाव से ऊपर उठकर संपूर्ण मानवता को सुख पहुंचाने का प्रय| करते हैं। उन्होंने कहा कि ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति करने से बड़े बड़े पापियों का सुधार हुआ है। जब बड़े-बड़े पापी, कपटी, कामी क्रोधी, बदले जा सकते है तो हम क्यों नहीं बदल सकते।
उन्होंने कहा कि निरंकार प्रभु परमात्मा सर्वत्र है। हर समय इसका अहसास मन में बसाकर रखे। केवल ज्ञान लेना ही इस जीवन का उद्देश्य नहीं है।