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मोदी से हमें ही नहीं नेपाल के लोगों को भी उम्मीद
हमारे कार्यक्रम देख नचाने लगे विदेशी मेहमान
विदेशी भी कायल हुए इंडियन कल्चर प्लानिंग के
डीएवीगर्ल्सकॉलेज में सोशल साइंस विभाग एवं वुमेन स्टडीज सेंटर द्वारा डेवलेपमेंट एंड मॉडर्नाइजेशन इन्क्लूजन एंड एक्सक्लुजन विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का रविवार का समापन हो गया। इसमें चीन, नेपाल सहित अन्य देशों के प्रतिनिधियों ने शोध पत्र पेश किए। पहले दिन विदेशियों ने अपने विचार रखे। दूसरे दिन हमारी कल्चर और प्लानिंग सुनकर अपनी सरकार को सौंपने की बात कह गए।
सेंट्रल यूनिवर्सिटी महेंद्रगढ़ से आए डाॅ. चंचल कुमार शर्मा ने आधुनिकीकरण को मानवीय विकास के रूप में परिभाषित किया। जिस समाज में गरीब जनता को मूलभूत लोक सेवाएं उपलब्ध ना हो, उसे आधुनिक समाज नहीं कहा जा सकता। मानव विकास के बिना आर्थिक एवं राजनीतिक विकास संभव नहीं है। प्रजातंत्र तब तक सफल नहीं होगा, जब तक व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं मिलेगी। हंसराज महिला महाविद्यालय जालंधर की प्रिंसिपल रेखा कालिया ने कहा कि आधुनिक युग में सुविधाएं बढ़ती जा रही है। जिसका समाज, राजनीति, धर्म एवं अर्थ पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है। आधुनिक युवा पीढ़ी के रूप में हम मूल्यविहीन डिग्रीधारकों का निर्माण कर रहे हैं। युवा पीढ़ी भावी राष्ट्र निर्माता है। शिक्षा के माध्यम से उनमें अच्छे जीवन मूल्यों का निर्माण करने की आवश्यकता है।
आधुनिक युवा पीढ़ी पश्चिमी संस्कृति, खान-पान के अंधानुकरण में अपनी संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों को भूलती जा रही है।
बेंगलुरू से आए प्रोफेसर प्रमोद कुमार ने कहा कि कृषि हमारे जीवन का अहम हिस्सा है। 40 वर्षों से कृषि में विकास एवं शोध हो रहे हैं। हम कृषि में आत्मनिर्भर तो हो रहे हैं, खाद्यान की कमी नहीं है, परंतु समुचित भंडारण ना होने के कारण प्रति व्यक्ति अनाज का वितरण नहीं हो पा रहा है।
डीएवी गर्ल्स कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर किरण शर्मा ने कहा कि प्रत्येक काल की अपनी आधुनिकता होती है। आधुनिकता एक प्रक्रिया है, कोई अंतिम परिणति नहीं। दृष्टि है, स्वयं दर्शन नहीं। मूल्य विघटन के संदर्भ में आधुनिकता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आधुनिक युग के नागरीय परिवेश एवं औद्योगिकीकरण के कारण मानव ने अकेलेपन की भावना पनप रही है। आधुनिका के दो पक्ष स्पष्ट होते हैं, एक रूढिय़ों का विघटन तथा दूसरा परंपरा संशोधन एवं नए जीवन मूल्यों को स्वीकार करना।
पैनल डिस्कशन के अंत में केरल विश्वविद्यालय के खेल विभाग के पूर्व डीन प्रोफेसर एमएल कमलेश ने इस बात पर जोर दिया कि विकास तथा आधुनिकीकरण की चुनौती से निपटने के लिए एक चहुंमुखी प्रयास की आवश्यकता है। जो केवल नई पीढ़ी के लोग ही करने में सक्षम हो सकते हैं।
कॉलेज प्रिंसिपल डाॅ. सुषमा आर्य ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के उपरांत जो विचार उभरकर सामने आते हैं, उन्हें सरकार तक पहुंचना होता है। उन्होंने कहा कि अगर भारत साउथ एशिया रीजन में अपना किरदार ठीक से अदा करें, तो एक लीडर के रूप में उभर कर सामने सकता है।
कुछ शहरों में नहीं उनके देश से लगते राज्यों का हो विकास
भारतके उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, त्रिपुरा आदि की विकास के मामले में स्थिति ज्यादा बेहतर नहीं है। इस राज्यों का विकास होने से पड़ोसी देशों को लाभ होगा। डॉ. पांडे ने कहा कि भारत के विदेश मंत्रालय को समझना चाहिए कि वह अपने पड़ोसी देशों के साथ सौहार्द संबंध कायम कर आर्थिक प्रगति में सहयोग दें।
यमुनानगर. भरतनाट्यम की प्रस्तुति देखकर इंडोनेशिया की पूर्व इलेक्शन कमीश्नर डाॅक्टर श्रीनूरयंती अपने आप को रोक नहीं पाई।
नेपाल से आए डॉक्टर निश्चल नाथ पांडेय।
एक वीजा बने दक्षिण एशिया का
उन्होंनेकि यूरोप देशों के लिए वीजा एक ही लगता है। इसी तरह की व्यवस्था दक्षिण एशिया के देशों में होनी चाहिए। ऐसा होने से इन देशों के लोग एक दूसरे के करीब आएंगे और संबंधों में सुधार होगा।