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हम तब खुशहाल होंगे जब हमारा पड़ोसी खुशहाल होगा

6 वर्ष पहले
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यमुनानगर | कुछमुद्दे ऐसे होते है जो एक देश या सरकार के स्तर पर नहीं सुलझ सकते। इसके लिए सरकारों को मिलजुल कर प्रयास करने होंगे। इसके लिए पास पड़ोस के देशों की आंखें भारत सरकार पर टिकी हैं। ये देश समृद्ध होंगे तो भारत को विश्व नेता बनने से कोई रोक नहीं सकता। सेमिनार की अध्यक्षता कर रही प्रिंसिपल सुषमा आर्य का कहना है कि विभिन्न देशों के विशेषज्ञों के माध्यम से जो सुझाव आए है। उनको यूजीसी हायर एजूकेशन के माध्यम से केंद्र राज्य सरकार के पास यह सुझाव जाएंगे। डीएवी गर्ल्स कॉलेज में दो दिवसीय इंटरनेशनल सेमिनार में विश्व के विकास के लिए विभिन्न सरकारों का ध्यान आकर्षण कराने पर चिंतन किया गया। पूरे विश्व के विकास के लिए एक दूसरे की आवश्यकताओं को समझने की जरूरत पर जोर दिया गया।

येआए सुझाव : चीनके सुचान एकेडमी ऑफ सोशल साइंस से आई डॉ. यूईं जॉहुमिन ने सुझाव दिया कि सबसे पहले भारत में हर नागरिक को रोटी, कपड़ा मकान उपलब्ध करवाना जरूरी है। देश में बेघरों को चीन की तर्ज पर 70 साल की लीज पर मकान उपलब्ध करवाने की पॉलिसी बनाई जानी चाहिए। जिससे लोगों का सरकार नेताओं में विश्वास बढ़ेगा।

एक देश का विकास इस बात पर निर्भर करता है कि उसके नागरिकों की बेसिक जरूरतें पूरी हों। शिक्षा स्वास्थ्य आवास संबंधी सुविधाओं के आधार पर ही एक देश के विकास का आंकलन किया जाना चाहिए। नेपाल के डायरेक्टर आफ सेंटर फार साउथ एशियन स्टडी डॉक्टर निश्चलनाथ पांडे का कहना है कि भारत को यदि ग्लोबल पॉवर बनाना है, तो पड़ोसी देश नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मालद्वीप ,अफगानिस्तान के विकास की भी सोच रखनी होगी। कहावत भी है कि यदि हम खुशहाल रहना चाहते है तो हमारा पड़ोसी भी खुशहाल होना चाहिए। भारत सरकार को चाहिए कि इन छोटे देशों को साथ लेकर नए इतिहास की रचना करें। एक अन्य वक्ता के अनुसार आने वाला समय साउथ एशियन कंट्रीज का है। इसके लिए हम केवल अंग्रेजी भाषा पर निर्भर रह कर इन देशों की भाषाओं को भी विकसित करने पर जोर दें। इसके लिए छोटे देशों के नेताओं को केवल भारत से उम्मीद है।

एक दूसरे देश की भाषा को समझने के लिए राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार आयोजित किए जाने चाहिए।

नैतिकता पर ध्यान देना जरूरी

वक्ताओंका कहना है कि शिक्षा के विस्तार के साथ नैतिकता दिन पर दिन गिर रही है। इसके लिए जहां लोग जिम्मेवार हैं वहीं सरकारें भी कम जिम्मेवार नहीं। इसलिए सरकार को चाहिए कि नैतिक मूल्यों की स्थापना की जिम्मेवारी सुनिश्चित करे। शिक्षा के साथ नैतिकता को भी शामिल किया जाए। जब सार्क देशों के लोग बाहर (कनाडा, आस्ट्रेलिया या अन्य देशों में) आपस में मिलते हैं, तो वे एक परिवार के सदस्यों की तरह व्यवहार करते हैं। क्योंकि उनका कल्चर मिलता है। यहां पर मिलते समय भी ऐसा होना चाहिए।

सुषमा आर्य