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वीणा पर संगीत की स्वर लहरियों से सभी मंत्रमुग्ध
कसीतारपर नाजुक से स्पर्श ने। ऐसी सुर लहरियां पैदा की कि जिसने भी सुनी वाह कर उठा। मौका था ग्लोबल इंडियन की उपाधि से विभूषित सात्विक वीणा वादक सलील भट्ट (ग्रैमी अवार्ड विजेता विश्वमोहन भट्ट के बेटे) के वीणा वादन कार्यक्रम का। सुर-ताल और लय यह सिलसिला घंटों तक आबाध जारी रहा। डीएवी गर्ल्स कॉलेज के कार्यक्रम में संगीत विभाग स्पिक मैके की ओर से सात्विक वीणा वादक सलिल भट्ट ने शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति दी। कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. सुषमा आर्य और संगीत विभागाध्यक्षा डॉ. नीता द्विवेदी ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
कार्यक्रम की शुरुआत में सलिल भट्ट ने सात्विक वीणा पर चारूकेसी राग बजाया। इसे सुनकर सभागार में बैठे सभी श्रोता मंत्रमुग्ध हो उठे। इस राग की खास बात यह है कि इसे दिन में किसी भी समय बजाया जा सकता है। सर्वप्रथम संगीत का स्वरूप प्रदर्शित करने के लिए अलाप और जोड़ा अलाप बजाया। तीन ताल में उन्होंने विलंबित गत की शुरुआत की।
इसके बाद द्रुतलय में गत बजाई। वीणा पर संगीत की स्वर लहरियां नीचले स्तर से शुरू होकर उच्चस्तर तक पहुंच गई। इस दौरान सलिल भट्ट ने वीणा बजाकर स्वरों के द्वारा सवाल पूछे, जिनका तबला वादक ने ताल के जरिए जवाब दिया। इस जुगलबंदी को देखकर सभागार में बैठे सभी टीचर्स तथा छात्राएं अभिभूत हो उठीं। इसके उपरांत उन्होंने अनेक प्रकार से झाला बजाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के दौरान हिमांशु महंत ने तबले पर संगत दी। भट्ट ने कहा कि भारतीय संगीत को स्पीड में नहीं बांधा जा सकता। शास्त्रीय संगीत को लेकर युवाओं और समाज में अनेक भ्रांतियां फैली हुई है। अधिकांश युवाओं ने धारणा बना रखी है कि शास्त्रीय संगीत उनकी समझ से परे हैं। शास्त्रीय संगीत 20 से 25 हजार साल पुराना है। जबकि फिल्मी संगीत 70-80 साल पहले आया है।
डीएवी गर्ल्स कॉलेज में संगीत स्पिक मैके की ओर से संगीत कार्यक्रम।