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संगीत से सिर हीलता है और फिल्मी धुन पर पैर

6 वर्ष पहले
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यमुनानगर|मैं तबसे वीणा बजा रहा हूं, जब मेरी हाइट वीणा से भी छोटी थी। तब पापा कहते थे तू वीणा नहीं वीणा तुमको बजा रही है। 40 साल की अथक साधना के बाद सात्विक वीणा बजाने में महारत हासिल हो पाई है। इस शास्त्रीय वाद्ययंत्र का निर्माण भी उन्होंने ही किया है। दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में ग्लोबल इंडियन की उपाधि से विभूषित सलिल भट्ट ने कहा कि उनकी एजुकेशन कम नहीं है। एमबीए पास करने के बाद उन्होंने आईएमए की परीक्षा पास की। उनके चार साथी आज ब्रिगेडियर हैं। 21 साल पहले उनके पिता विश्व मोहन भट्ट को संगीत के सर्वोच्च अवार्ड ग्रैमी से नवाजा जा चुका है। इस अवार्ड के बारे में देश के लोग कम ही जानते थे। भट्ट डीएवी गर्ल्स कॉलेज में हो रहे कार्यक्रम में आए थे।

शास्त्रीयसंगीत सोच में ठहराव पैदा करता है : भट्टने कहा कि तकनीक का प्रयोग करके आज की युवा पीढ़ी स्वयं को ज्यादा स्मार्ट समझती है। जब संगीत के च्वाइस की बात आती हैं, तो वे फिल्मी धुनों को तरजीह देती है। उस समय उनकी अकलबंदी कहां जाती है। देश के 500 शहरों में घूमकर उन्होंने इसका कारण निकाल लिया। युवा पहले से ही मन बना लेते हैं कि शास्त्रीय संगीत सुनकर बोरियत होगी। इसका नाम सुनकर ही उनके मन में ऐसे भाव जाते है। इसका कारण साफ है कि उनका दायरा सीमित बना दिया गया है। शास्त्री संगीत (20 हजार साल पुराना) के बारे में उनको जानकारी दी जा रही। इस संगीत से सुकून सोच में ठहराव आता है। इससे सोच विचार पॉजीटिव हो जाती है। आधुनिक संगीत के कारण नैतिकता का पतन हो रहा है। हम अपनी संस्कृति भूल रहे हैं। फास्ट संगीत के तरह छोटी बात से पर आदमी आक्रामक होकर हमला अपराध कर देता है। सलिल भट्ट नें बताया कि अभी तक उन्होंने 40 देशों में शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियां दी हैं।

भारत ही भेजता है विदेशों में वीणा

यहभ्रांति है कि गिटार कई अन्य वाद्य यंत्र विदेशों से आए हैं। भारत ही विदेशों में वीणा भेज रहा है। गिटार भी वीणा का एक रूप है। वीणा 100 तरह की होती है। 100 तार की वीणा को संतूर कहा जाता है। जबकि एक तार की वीणा को इकतार का नाम दिया है सरस्वती के हाथ में जो वीणा है, उसमें 14 तार होते हैं।

नर्सरी स्तर पर शुरू हो शास्त्रीय संगीत

जबतक संगीत को नर्सरी स्तर पर लागू नहीं किया जाएगा, तब तक पीढ़ी में उसके प्रति समझ विकसित नहीं हो सकती। हालांकि उन्होंने इस बारे में केंद्र और राज्य सरकारों से बात की है। लेकिन आज तक सिरे नहीं चढ़ पाई है। स्पिक मैके ने अपने स्तर पर मुहिम चला रखी है, युवाओं तक शास्त्रीय संगीत पहुंचाने की।