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स्वाइन फ्लू से दो महिलाओं की मौत, 2 की हालत गंभीर
जिलेवासियोंका स्वास्थ्य खतरे में है। कारण स्वाइन फ्लू पूरी तरह से यहां पर पांव पसरा चुका है। उपचार के दौरान दो महिलाओं की स्वाइन फ्लू की बीमारी से मौत हो गई। वहीं दो महिलाएं ऐसी हंै जिनका उपचार चंडीगढ़ में चल रहा है। वहां उनकी हालत नाजुक बनी है। सीएमओ डॉ. वीपी मान ने इसकी पुष्टि की है।
महिलाकी मौत : प्रेमनगर कॉलोनी निवासी मोहित की मां पूनम रानी की 3 फरवरी को बुखार, कफ गले में खराबी के कारण तबीयत बिगड़ गई। पूनम की हालत खराब होते ही परिजनों ने उन्हें निजी अस्पताल में दाखिल कराया। बाद में र्फोटिज अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। 10 फरवरी को महिला की मौत हो गई। रिपोर्ट में स्वाइल फ्लू का कारण बताया गया है।
पंचकूलाएलकेमिस्ट में हो गई मौत : तेजलीनिवासी 57 वर्षीय मूर्ति की तबीयत 7 फरवरी को बिगड़ गई। बेटे रवि कुमार ने मूर्ति देवी को गोविंदपुरा रोड स्थित अस्पताल में दाखिल कराया। हालत ज्यादा खराब होने पर पंचकूला आलकेमिस्ट में रेफर कर दिया। 11 फरवरी को महिला की मौत हो गई।
इनकीहालत बनी है नाजुक : जम्मूकॉलोनी निवासी 55 वर्षीय देवी की भी तेज बुखार, खांसी जुकाम के कारण तबीयत बिगड़ी हुई है। देवी का उपचार पीजीआई चंडीगढ़ में चल रहा है। वहीं प्राइवेट स्कूल की टीचर 38 वर्षीय मनीषा की हालत भी बिगड़ गई। उन्हें मोहाली स्थित मैक्स अस्पताल में परिजनों ने दाखिल करा दिया।
वहां पर वेटिंलेटर पर उनका उपचार चल रहा है। इन दोनों महिलाओं की यमुनानगर स्वास्थ्य विभाग के पास रिपोर्ट गई है। इसमें स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है।
पहलेभी हो चुकी है टीचर की मौत : जगाधरीके स्कूल में फिजिक्स के एचओडी एसएस दास की भी इसी बीमारी से मौत हो चुकी है। लेकिन स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने मौत का कारण हार्ट में कंप्लीकेशन बताया था। हालांकि दास की डेथ रिपोर्ट में फोर्टिज अस्पताल ने स्वाइन फ्लू को संदिग्ध बताया था।
ऐसे फैलता है : स्वाइनफ्लू का वायरस हवा में ट्रांसफर होता है। खांसने, छींकने, थूकने से वायरस सेहतमंद लोगों तक पहुंच जाता है। बीमारी के बढ़ने पर एंटी वायरल दवाई ओसेल्टामिविर (टैमी फ्लू) और जानामीविर (रेलेंजा) जैसी दवाओं से इलाज किया जाता है। अप्रैल 2009 में इसे सबसे पहले मैक्सिको में पहचाना गया था।
क्या है स्वाइन फ्लू : स्वाइनफ्लू दरअसल सुअरों के बुखार को कहते हैं, जो उनकी सांस से जुड़ी बीमारी है। ये जुकाम से जुड़े एक वायरस से पैदा होती है। ये वायरस मोटे तौर पर चार तरह के होते हैं। एच-1 एन-1, एच-1 एन-2, एच-3 एन-2 और एच-3 एन-1 है। इसमें एच-1 एन-1 सबसे खतरनाम माना जाता है। बारिश की वजह से स्वाइन फ्लू का वायरस और घातक हो जाता है।
उपाय : विशेषज्ञोंके अनुसार खांसते और छींकते समय मुंह पर नाक पर टिशू पेपर रखें, दिन में कई बार हाथ में हैंडस क्लोनर का इस्तेमाल करें। बस या ऑटो में सफर कर रहे हैं तो पास बैठे लोगों के संपर्क में आने से बचें। दूसरे लोगों से तीन फीट की दूरी पर रहें। पीने में गर्म पानी का इस्तेमान करें। इससे मुंह में गए विषाणु मर जाते हैं। हो सके तो नाक पर एन-95 किस्म का मास्क इस्तेमाल करें। सर्दी शुरू होते ही वैक्सीफ्लू एच-1 एन-1 इंजेक्शन लगवाएं।
लक्षण : आईएमएके अध्यक्ष डॉ. अनिल अग्रवाल के अनुसार अगर किसी को खांसी, जुकाम, तेज बुखार,छीकें रही है, सिर में दर्द, नाक बहना, गले में दर्द और उल्टी-दस्त लग रहे हैं तो स्वाइन फ्लू हो सकता है। लेकिन इसकी पुष्टि टेस्ट के बाद ही होती है। इसके लिए पीसीआर टेस्ट, वायरल कल्यर या रैपिड टेस्ट होता है। टेस्ट की रिपोर्ट के बाद ही यह क्लियर होता है कि स्वाइन फ्लू है या नहीं।
सवाल : दोमहिलाओं की मौत हो गई और 2 पीडि़त हैं। क्या हो रहा है जवाब: जानकारीमें यह मामला है। एक महिला को हार्ट की बीमारी थी। जिनका उपचार चल रहा। वे परिवार के संपर्क में है। सवाल: विभागके पास वेंटिलेटर तो नहीं है तो इस बीमारी से कैसे निपटा जाएगा। जवाब: आईसोलेशनवार्ड बना है। वेंटिलेटर के लिए प्राइवेट अस्पताल से तालमेल किया हुआ है।
वीपी मान, सीएमओ।