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सतगुरु के बिना सारपदार्थ का नहीं पता चलता भेद: ज्ञाननाथ

5 वर्ष पहले
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निराकारीजागृतिमिशन के गद्दीनशीन स्वामी ज्ञाननाथ महाराज ने कहा कि आत्मदर्शी सतगुरु के बिना सारपदार्थ का भेद पता नहीं चलता। उन्होंने कहा कि शारीरिक, बौद्घिक मानसिक विकास के साथ आध्यात्मिक ज्ञान होना भी बेहद जरूरी है। ज्ञाननाथ कोतरखाना गांव में आयोजित रुहानी सत्संग में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। राजिंद्र की अध्यक्षता में हुए पावन यज्ञ में दिव्य शक्तियों के बीज मंत्रों से सभी के सुख शांति और समृद्धि के लिए आहुतियां डाली गई। ज्ञाननाथ ने कहा कि यज्ञ से नकारात्मक उर्जा का विनाश सकारात्मक उर्जा का विकास होता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा से बाहरी और आत्मज्ञान से आंतरिक विकास होता है। सिर्फ कर्मयोगी ही अपनी मंजिल तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि नाम दो प्रकार का होता है। वर्णात्मक और धुनात्मक। सिर्फ धुनात्मक नाम से सुरीली मनमोहक धुन ही प्रभु मिलन और प्रत्यक्ष में दर्शन करने का एकमात्र सटीक साधन है। मौके पर सुरजीत, रामप्रसाद, विशाल, रोशन, अनिल, राजकुमार, अनिल, बबली, माया, पूनम, पिंकी, प्रीति, सुमन संगीता भी मौजूद थी। सत्संग के समापन पर अटूट लंगर भी बरताया गया।

यमुनानगर | कोतरखानामें रुहानी सत्संग में प्रवचन करते स्वामी ज्ञाननाथ महाराज उपस्थित श्रद्धालु।

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