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रेडियो जॉकी बनने के लिए लोगों के साथ जुड़ाव जरूरी

6 वर्ष पहले
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यमुनानगर | युवाजो मुद्दे उठाना चाहते हैं, रेडियो उन्हें तरजीह देने का काम कर रहा है। यह बात वर्ल्ड रेडियो डे के उपलक्ष्य में डीएवी गर्ल्स कॉलेज में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग सांझा रेडिया की ओर से रेडियो पर आयोजित वर्कशाप के दूसरे दिन जॉकी सुंदर मोहन ने कही। दूसरे दिन छात्राओं को रेडियो ऑटेमेशन मैनेजमेंट, स्क्रिप्ट, रिकार्डिंग तथा ब्रॉडकास्ट मैनेजमेंट से संबंधित तकनीकी जानकारी दी। कॉलेज प्रिंसिपल डाॅ. सुषमा आर्य ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। 13 फरवरी को यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड रेडियो डे सेलिब्रेट किया जा रहा है।

सांझा रेडियो के डायरेक्टर मधुकर ने कहा कि रेडियो ऑटेमेशन एक सॉफ्टवेयर है, जो ब्रॉडकास्टिंग में मदद करता है। रेडियो पर जो चीजें ऑन एयर चलाई जाती हैं, उन्हें ग्रुप्स में बांट लिया जाता है। साथ ही उन्होंने कार्यक्रम शुरू करने से पूर्व उसका इंट्रोडक्शन (परिचय) दिया जाता है। जिसे प्रोमो कहा जाता है। ताकि श्रोताओं के मन मस्तिष्क में उस प्रोग्राम से संबंधित छवि उभर सकें।

ब्रॉडकास्टिंग के दौरान टाइमिंग, वाइस ओवर, जिंगल (सांग) के साथ-साथ विज्ञापनों का भी खास ध्यान रखना होता है। साथ ही उन्होंने आरसीएस, पावर गोल्ड, सिनर्जी, ग्रींस सहित अन्य रेडियो सॉफ्टवेयर के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विभाग के इंचार्ज परमेश त्यागी रेडियो जॉकी सुंदर मोहन ने सांझा रेडियो पर ऑन एयर किए जाने वाले कार्यक्रम एसएमएस मस्ती तथा यूथ जंक्शन का डेमोस्ट्रेशन के जरिए छात्राओं को रेडियो जॉकी बनने के लिए प्रोत्साहित किया। दुनिया में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है, जिसकी आवाज खराब हो। रेडियो जॉकी बनने के लिए सबसे जरूरी लोगों के साथ जुड़ाव जरूरी है। साथ ही मुद्दों पर पकड़, चीजों का विश्लेषण करने की क्षमता तथा सामान्य ज्ञान की विस्तृत जानकारी होना बेहद जरूरी है। मौके पर सुखजीत कौर, राखी खौसला, टेक्निकल असिस्टेंट सुशील कुमार उपस्थित रहे।