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स्वाइन फ्लू की चपेट में शहर, एक ही फिजिशियन है, उसे भी भेजा ट्रेनिंग पर
स्वाइनफ्लूसे दो महिलाओं की मौत हो गई और दो जिंदगी मौत के बीच जूझ रही हैं। स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीज उपचार के लिए अस्पताल में भटक रहे हैं। उनको उपचार मिलना तो दूर पर्ची तक देने से इसलिए मना कर दिया जा रहा है कि फिजिशियन डॉक्टर ट्रेनिंग पर चंडीगढ़ में गए हैं। वहीं एक वार्ड के आइसोलेशन वार्ड पर ताला लगा हुआ है। ऐसे में लोगों का स्वास्थ्य राम भरोसे है। लोगों को मजबूरी में अधिक पैसे देकर प्राइवेट अस्पताल में उपचार करना पड़ रहा है।
नियम के मुताबिक प्राइवेट अस्पताल संचालकों को इस बीमारियों के मरीजों की स्वास्थ्य विभाग को सूचना देनी चाहिए। मगर ऐसा नहीं हो रहा है। इस पर भी स्वास्थ्य विभाग मौन है। जिले की आबादी करीब 14 लाख है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक रूम का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है।
सिविल अस्पताल में दो फिजिशियन थे। डॉक्टर अजय ने इसलिए नौकरी छोड़ दी कि उनको रेगुलर नहीं किया और वे सितंबर माह में नौकरी छोड़कर चले गए। अब फिजिशियन डॉक्टर विनित जैन के कंधों पर भार पड़ा। मगर हद तो तब हो गई स्वाइन फ्लू की बीमारी पर काबू करने वाले एक मात्र डॉक्टर को चंडीगढ़ में इको ट्रेनिंग लेने के लिए पांच फरवरी को भेज दिया। अब अस्पताल में मरीज भी जाए तो उनको बिना फिजिशियन के कैसे उपचार मिलेगा। इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। वहां पर जाने से पहले स्वाइन फ्लू ने लोगों को चपेट में लेना शुरू कर दिया था। 29 जनवरी को जगाधरी के प्राइवेट स्कूल में फिजिक्स के एचओडी एसएस दास की मौत हो गई। उसके बाद भी विभाग गंभीर नहीं हुआ।
दूसरेराज्यों के लोग आते हैं यहां हर रोज : यमुनानगरजिला यूपी, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड की सीमा से सटा है। यूपी के लोगों का लक्कड़ मंडी, फैक्टरियों कॉलेज में स्टूडेंट्स का हर रोज आना होता है। यहां के मेटल, प्लाईवुड व्यापार के संबंध में व्यापारी दिल्ली सहित अन्य राज्यों में व्यापार के लिए जाते है। उसके बाद भी ट्रॉमा सेंटर में एक बेड का आइसोलेशन वार्ड खानापूर्ति के लिए बनाया गया। मगर उस पर भी ताला लटका हुआ है। जिसकी चाबी का भी स्टाफ को पता नहीं। स्टॉफ का कहना है कि इस बारे में डॉक्टर को पता होगा।
प्रभावित परिवार का किया चेकअप
शुक्रवारको स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित परिवार के छह सदस्यों को चेक किया। साथ ही उनको दवाई दी, ताकि यह बीमारी अन्य लोगों को चपेट ले।
भास्कर संवाददाता ने स्वाइन फ्लू से लोगों को बचाने के लिए स्टाफ से बात की तो उनका कहना था कि ट्रामा सिविल अस्पताल में फिजिशियन नहीं है। इस बीमारी से पीड़ित मरीज को आईएनटी डॉक्टर चेक कर रहे है। ज्यादा दिक्कत आने पर मरीज को जगाधरी सिविल अस्पताल में रेफर कर दिया जाएगा। अभी तक अन्य अस्पताल से जिला अस्पताल ट्रॉमा सेंटर में मरीज रेफर होकर आते थे।
स्लिप बनाने से इंकार कर दिया
फर्कपुरके संजीव का कहना है कि उनको खांसी, जुकाम नजला की दिक्कत थी। वह मार्क्स लगाकर शुक्रवार सुबह सिविल अस्पताल में पहुंचे। पर्ची के लिए लाइन लगा। मगर स्टाफ ने पर्ची बनाने से इसलिए इंकार कर दिया कि उपचार के लिए फिजिशियन नहीं है। बाद में सीएमओ ने संजीव को फोन पर उपचार के लिए बुलाया और स्टाफ को हिदायत दी कि सभी की पर्ची बनाई जाए।
वायरस से यूं करें बचाव
डॉक्टरअनिल अग्रवाल का कहना है कि स्वाइन फ्लू का वायरस हवा में ट्रांसफर होता है। किसी घर में कोई शख्स स्वाइन फ्लू संदिग्ध फ्लू की चपेट में गया तो, घर के बाकी लोगों को इससे बचने के लिए डॉक्टरी सलाह लेकर ही दवाइयां लेनी चाहिए। बीमारी के बढऩे पर एंटी वायरल दवाई ओसेल्टामिविर (टैमी लू) और जानामीविर (रेलेंजा) जैसी दवाओं से स्वाइन फ्लू का इलाज किया जाता है। उनका कहना है कि अप्रैल 2009 में इसे सबसे पहले मैक्सिको में पहचाना गया था। तब इसे स्वाइन फ्लू इसलिए कहा गया था क्योंकि सुअर में लू फैलाने वाले इन लुएंजा वायरस से ये मिलता-जुलता था।
इनकी हो चुकी है मौत
प्रेमनगर निवासी पूनम कुमार तेजली निवासी मूर्ति की स्वाइन लू की बीमारी से हो गई। वहीं प्राइवेट स्कूल की टीचर मनीषा जम्मू कॉलोनी निवासी देवी की हालत गंभीर बनी है। उनका उपचार चंडीगढ़ में चल रहा है।
अगर ऐसे लक्ष्ण मिलें तो तुरंत टेस्ट कराएं
डॉक्टरअनिल अग्रवाल ने बताया कि खांसी, जुकाम, छींकें, सिर में दर्द, नाक बहना, गले में दर्द, बुखार और उल्टी-दस्त लग रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर्स से संपर्क करें। स्वाइन फ्लू का पता लगाने के लिए पीसीआर टेस्ट, वायरल कल्यर या रैपिड टेस्ट होता है। रिपोर्ट के बाद ही यह क्लियर होता है कि स्वाइन फ्लू है या नहीं। मुंह नाक पर टिशू पेपर रखें, दिन में कई बार हाथ में हैंड्स क्लोनर का इस्तेमाल करें। बस या ऑटो में सफर कर रहे हैं तो पास बैठे लोगों के संपर्क में आने से बचें। दूसरे लोगों से तीन फीट की दूरी पर रहें। हाथ मिलाने के बजाए नमस्ते करें।
^उनके जिला अस्पताल में फिजिशियन डॉक्टर नहीं है। जो भी संदिग्ध मरीज रहे है। उनका उपचार ईएनटी विशेषज्ञ द्वारा कराया जा रहा है। दवाईयों की कोई कमी नहीं है। रही बात वार्ड पर ताला की। जब मरीज आएगा ताला खोल दिया जाएगा। डॉक्टरवीपी मान, सीएमओ