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न्यूज पढ़कर बुजुर्ग दंपती ने लिया देह दान का फैसला

6 वर्ष पहले
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दैनिकभास्करमें 11 जनवरी को न्यूज छपी थी। इसमें लिखा था कि पांच लोगों ने देह दान कर दी। न्यूज को पढ़कर मेरे भी मन में उबाल आया। कई दिन तो सोच विचार किया और फिर मन बना लिया देह दान का। प|ी के सामने बात रखी तो उसने भी हां में हां मिला दी। बस फिर क्या था हमने भी संपर्क किया और महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज आरोही हिसार को देह दान कर दी।

यह कहना था जगाधरी के कल्याण नगर निवासी दंपती बृजभूषण लाल और उनकी प|ी पदमा देवी का। अपने इस फैसले पर 77 वर्षीय बृजभूषण लाल कहते हैं कि न्यूज पढ़ने के बाद मेरी समझ में आया कि मरने के बाद भी हमारा शरीर किसी के काम सकता है। सांसें थमने के बाद भी अगर हम किसी के काम आए तो इससे बड़ा पुण्य शायद ही कोई और हो।

एलआईसीमें रहे क्लास वन आफिसर : बृजभूषणलाल ने बताया कि 1954 से उन्होंने प्राइवेट सेक्टर में जॉब करनी शुरू की थी। अलग-अलग कंपनियों में जॉब की और बाद में एलआईसी में क्लास वन आफिसर के पद तक पहुंचे। 1995 में एलआईसी से रिटायर होने के बाद घर पर रहते हैंं। उनका कहना है कि दिल में समाज के लिए कुछ कर गुजरने की तमन्ना थी, लेकिन 77 साल की उम्र हो गई थी, क्या करते। कुछ कर भी नहीं पाते।

बृजभूषण लाल ने बताया कि 11 जनवरी को घर पर भास्कर न्यूज पेपर आया। यमुनानगर भास्कर के पहले पेज पर न्यूज लगी थी कि दोस्त ने बेटे की आंखें दान की तो तीन दोस्तों ने देह कर दी दान। इस न्यूज को अपनी प|ी पदमा को भी दिखाया। कई बार न्यूज को पढ़ा। उनका कहना है कि यह न्यूज उनके जीवन में एक प्रेरणा बनी। यहीं से उन्होंने भी देह दान करने की बात सोची और सोच विचार के बाद पति-प|ी ने फैसला ले लिया।

मिट्टी में मिलाएं, मरने के बाद भी किसी के काम आएं

दंपतीका कहना है कि मरने के बाद शव को जला दिया जाता है और वह मिट्टी में मिल जाता है। मिट्टी में मिलने से अच्छा है कि हम मरने के बाद भी किसी के काम आए। समाज में कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें भगवान ने आंखें नहीं दी, हमारे मरने के बाद हमारी आंखों से वे दुनिया देख सकेंगे। इसके साथ ही जो स्टूडेंट्स मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं उन्हें प्रेक्टिकल के लिए बॉडी की जरूरत पढ़ती है। हमारे मरने के बाद हमारी बॉडी पर प्रशिक्षण लेकर स्टूडेंट्स अच्छे से सीख पाएंगे और हमारे समाज को अच्छे डॉक्टर मिल सकेेंगे। उनका कहना है कि हर किसी को यह फैसला लेना चाहिए। क्योंकि मरने के बाद भी हमारा शरीर बहुत कीमती हैं। हमारा एक-एक अंग किसी के जीवन को सुधार कर उसकी दुनिया संवार सकता है। बुजुर्ग दंपती का कहना है कि उन्होंने जो फैसला लिया है ऐसा करने के लिए वे दूसरों को भी प्रेरित करेंगे।

बृजभूषण लाल पदमा देवी