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जमीन के केस में कोर्ट का कॉलेज के हक में फैसला

5 वर्ष पहले
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सिविलकोर्ट नारनौल ने शहर के रेलवे रोड स्थित राजकीय कॉलेज की जमीन पर चल रहे केस में कॉलेज के हक में फैसला दिया है।

एडीए (सहायक जिला न्यायवादी) पीआर शर्मा ने बताया कि शहर के रेलवे रोड स्थित कॉलेज के लिए वर्ष 1949 में जमीन का अधिग्रहण किया गया था। कॉलेज का यह भवन 1954-55 में बनकर तैयार हुआ था। वर्ष 2011 में भूप सिंह पुत्र पूर्णचंद इत्यादि 15 लोगों ने राजकीय कॉलेज नारनौल की अधिग्रहित की गई 10 बीघा जमीन का मुआवजा प्राप्त करने के लिए केस दायर किया था। उनका कहना था कि जमीन का कोई अवार्ड नहीं हुआ है। साथ ही इस जमीन का कॉलेज के हक में हुए इंतकाल को चुनौती दी थी। कॉलेज भूमि का अधिग्रहण का रिकार्ड काफी पुराना होने की वजह से मुकदमे में पेश नहीं हो पाया था। इसके कारण विभाग की तरफ से मुकदमे में गवाही बंद हो चुकी थी। इसके चलते हालात विकट बनते जा रहे थे।

पूर्वजों को दिया जा चुका था जमीन का मुआवजा

उपायुक्तने बताया कि राजस्व रिकार्ड में मिले कागजात में पाया गया कि वादियों के पूर्वजों को जमीन का मुआवजा दिया जा चुका था। यह रिकार्ड मिलने के बाद उन्होंने उपरोक्त रिकार्ड पेश करने के लिए एक दरखास्त अदालत में लगाई। इसके बाद संबंधित रिकार्ड पेश करने की इजाजत ली और उपरोक्त भूमि का अधिग्रहण से संबंधित मुआवजा राशि अदा करने का रिकार्ड अदालत में पेश किया।

29जनवरी को वादियों का केस किया था खारिज

अदालतने सारे रिकार्ड की जांच करने के बाद न्यायाधीश एमजेड खान सिविल जज (जूनियर डिविजन) नारनौल ने 29 जनवरी 2016 को वादियों का केस खारिज कर दिया और कॉलेज के हक में फैसला सुना दिया। उधर केस दायर करने वाली पार्टी के वकील प्रवीन गुप्ता का कहना है कि फैसले की कॉपी आने के बाद ही फैसले के बारे में कुछ कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि फैसले को आगे चुनौती देंगे।

दो माह की मेहनत के बाद मिला जमीन का रिकार्ड

राजकीयकॉलेज के प्रिंसिपल सुरेंद्र दत्त शर्मा, जिला न्यायवादी आनंद जागलान से इस मामले में मिले। इसके बाद मौजूद रिकार्ड को लेकर वे सभी उपायुक्त अतुल कुमार से मिले। इस काम में उपायुक्त ने स्वयं रुचि लेते हुए मामले को आगे बढ़वाया और जिला राजस्व विभाग के कार्यालय में मौजूद रिकार्ड को ढूंढने के सख्त आदेश दिए। रिकार्ड उर्दू में होने तथा काफी पुराना होने के कारण मिलने में दिक्कत पेश रही थी। करीब दो माह की मेहनत के बाद इस जमीन का रिकार्ड मिला।

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