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चुनाव शपथपत्र में मुकदमे की जानकारी छिपाने का आरोप

5 वर्ष पहले
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गांवमकसूसपुर के ग्रामीणों ने मंगलवार को राज्य चुनाव आयुक्त के नाम एक ज्ञापन उपायुक्त को सौंपकर गांव के नवनिर्वाचित सरपंच के दस्तावेजों की जांच करवाने तथा जांच में दोषी पाए जाने पर सरपंच के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर पद से हटाने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि नवनिर्वाचित सरपंच ने नामांकन पत्र के साथ शपथ पत्र में झूठे दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं।

पहलीसे आठवीं कक्षा के सर्टिफिकेट में जन्म वर्ष 1974, दसवीं में 1982

ग्रामीणसत्यपाल जाखड़, राजू, कुलदीप, राजेश, रणसिंह, ओमप्रकाश, अतर सिंह, किशन सिंह धनपत सिंह आदि ने उपायुक्त को सौंपे अपने ज्ञापन में बताया कि गांव मकसूसपुर में 17 जनवरी को पंचायत चुनाव के लिए मतदान हुआ था। चुनाव आयोग एवं सरकार ने पंचायत चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए शैक्षणिक समेत कई शर्तें रखी थी। शर्तें पूरे करने वाले व्यक्ति को ही चुनाव लड़ने का अधिकार दिया था। उनका आरोप है कि गांव मकसूसपुर के नवनिर्वाचित सरपंच ने अपने जन्म प्रमाण पत्र में अलग-अलग तारीख दर्शाई है। नवनिर्वाचित सरपंच ने अपनी पहली से 8वीं कक्षा तक की सर्टिफिकेट में जन्म तिथि 15 अक्टूबर 1974 दर्शाई है, जबकि 10वीं की नेशनल ओपन स्कूल की मार्क सीट में जन्म तिथि 17 जुलाई 1982 दर्शाई है।

इसके अलावा नवनिर्वाचित सरपंच ने उसके ऊपर न्यायालय में विचाराधीन किसी भी मुकदमे का विवरण नहीं दिया। जबकि उसके ऊपर राजस्थान के चिड़ावा थाने के अंतर्गत झुंझनू न्यायालय में मुकदमा विचाराधीन है।

8फरवरी तक नहीं था घर पर शौचालय

नवनिर्वाचितसरपंच ने अपने शपथ पत्र में घर पर शौचालय भी दिखाया हुआ है। जबकि 8 फरवरी तक उसके घर पर कोई शौचालय नहीं है। इस प्रकार नवनिर्वाचित सरपंच ने अपने शपथ पत्र में झूठे दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं। जो गैर कानूनी है। इसलिए सरपंच के दस्तावेजों की जांच करवा कर उसे सरपंच पद से हटा मुकदमा दर्ज किया जाए।

नारनौल. नवनियुक्तसरपंच के शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच करवाने की मांग को लेकर उपायुक्त से मिलने पहुंचे ग्रामीण।

जन्मतिथि में भी फेरबदल का लगाया आरोप

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