सरकारी कोच से लेनी होगी ट्रेनिंग
प्रदेशमें स्पैट के तहत स्कॉलरशिप का लाभ लेने वाले खिलाड़ियों को अब सिर्फ सरकारी कोच से ही ट्रैनिंग लेनी पड़ेगी। स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट ने स्कॉलरशिप लेने के नियमों में फेरबदल करने का प्लान किया है। इसके तहत खिलाड़ी अपनी मर्जी के कोच से कोचिंग नहीं ले सकेंगे। खेल मंत्री द्वारा सभी जिला खेल अधिकारियों की एक मीटिंग बुलाई है। खेल मंत्री ने खेल अधिकारियों से अपने जिले की सभी खेल एक्टीविज की रिपोर्ट भी मंगवाई है। 10 दिसंबर को होने वाली इस मीटिंग में स्पैट स्कॉलरशिप के नए प्लान पर चर्चा की जाएगी।
रिजल्टखराब : स्पैटके लिए चयनित हुए खिलाड़ियों का परिणाम अच्छा नहीं हो पा रहा है। जिससे खिलाड़ियों को दी जा रही स्कॉलरशिप का सदुपयोग नहीं हो रहा है। माना जा रहा है कि खिलाड़ियों की संख्या कम होने से बच्चों की प्रैक्टिस भी अच्छी हो सकेगी।
^अभी तक सिर्फ मौखिक चर्चाएं चल रही है और स्पैट से संबंधित कोई लिखित में आदेश नहीं मिला है। 10 दिसंबर को पंचकुला में खेल मंत्री के साथ मीटिंग में इस संबंध में कोई फैसला हो सकता है।
घट सकती है संख्या
खेलविभाग हर साल 5 हजार खिलाड़ियों को स्कॉलरशिप देता है, लेकिन इस बार विभाग इनमें भी कटौती करने जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि संख्या को घटाकर कम खिलाड़ियों को अधिक स्कॉलरशिप और सुविधाएं देकर उन्हें एक स्पोर्ट्स मैन बनाना चाहता है। स्पैट स्कॉलरशिप प्राप्त करने के जो नियम हैं, उसके तहत खिलाड़ी अपनी मर्जी के कोच से कोचिंग ले सकता है। वह स्कूल के पीटीआई टीचर या डीपीई या गांव में नियुक्त क्रीड़ा श्री से अटेंडेंस लिखवाकर स्कॉलरशिप लेने का हकदार है। इसके तहत प्रदेश भर से 5 हजार खिलाड़ियों का सलेक्शन किया जाता है।
4साल पहले हुई थी शुरू
2010में स्पैट के तहत खिलाड़ियों को प्रदेशस्तरीय टेस्ट के आधार पर मेरिट बनाकर स्कॉलरशिप दिए जाने की योजना शुरू हुई थी। स्पैट ट्रायल पास 8 से 14 आयु वर्ग के खिलाड़ियों को 1500 रुपये प्रतिमाह और 15 से 19 आयु वर्ग के खिलाड़ियों को 2 हजार रुपये की स्कॉलरशिप के साथ उन्हें फ्री में खेल का सामान भी दिया जाता है।