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कसार के प्रभावित किसान डीसी से फरियाद करने पहुंचे

7 वर्ष पहले
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झज्जरमें बगैर जरूरत के चार सेक्टरों के किसानों की कीमती एवं उपजाऊ भूमि के अधिग्रहण का मामला अभी ठंडा नहीं हुआ है कि बहादुरगढ़ में औद्योगिक विकास के लिए किसानों के लाल डोरे एवं आबादी वाली फिरनी के साथ लगते करीब 12 करोड़ से अधिक राशि के प्लाटों जमीन के अधिग्रहण का मामला गरमा गया है। कीमती जमीन को बचाने की गुहार लेकर कसार के किसान गुरुवार को डीसी कार्यालय पहुंचे।

कसार गांव निवासी महेंद्र सिंह सरदार सिंह ने बताया कि उनका प्लाॅट आबादी युक्त के साथ ही 417 के तहत 1957 58 से प्रयोग में है। इस जमीन को एचएसआईआईडीसी ने अधिग्रहण कर लिया है, जबकि इस क्षेत्र में उन्होंने प्लाॅटों की नींव भरी हुई थी, साथ ही में इसके आस-पास के क्षेत्र में मकान बने हुए हैं। इस प्लाट पर उनके परिवार के 30 के करीब हिस्सेदार हैं। जमीन को बचाने के लिए प्लाट का मुआवजा भी नहीं उठाया हुआ था, जबकि पुस्तैनी जमीन को एचएसआईआईडीसी ने अधिग्रहण कर लिया।

अधिग्रहण के बाद से यह जमीन उनके कब्जे में है, लेकिन अब कई साल के बाद एचएसआईआईडीसी के अफसर उन पर पुलिस द्वारा दबाव बनवाकर उसी जमीन पर मिट्टी डलवा रहे हैं। सरकार ने वर्ष 2006 में सेक्शन चार का नोटिस जारी कर उनकी 2008 में जमीन का अधिग्रहण कर लिया। अब नए कानून में किसानों का हक बनता है। जिसमें कहा गया है कि सरकार अधिग्रहण की गई जमीन का पांच साल तक कोई उपयोग नहीं करती है और यह जमीन किसान के कब्जे में है, तो इस किसानों को लौटाया जाए। नया कानून 1 जनवरी 2014 से लागू है।

झज्जर के 100 से अधिक मामले हाईकोर्ट में

जमीनअधिग्रहण के मामले में रोहतक, झज्जर और बहादुरगढ़ में बहुत सारे मामले कोर्ट में पहुंचे हैं। झज्जर में हाल ही में चार सेक्टरों के लिए जमीन का अधिग्रहण किए जाने के बाद इस क्षेत्र में भारी संख्या में लोगों ने कोर्ट का रुख कर लिया है। किसानों का आरोप है कि सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिन में किसानों की जमीन का अधिग्रहण यहां पर सेक्टरों के प्लाट काटने के लिए किया, जबकि शहर में पहले से ही सेक्टर छह नौ हैं, जहां पर आज तक पांच फीसदी भी आबादी सुविधाएं नहीं है। लिहाजा सरकार ने खुले बाजार में 3 से 5 करोड़ प्रति एकड़ की जमीन के लिए करीब 70 लाख रुपए का मुआवजा दिया है।

जमीन अधिग्रहण के विरोध में डीसी से मिलने आए कसार के ग्रामीण।